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अनुसचिव पर दस हजार का जुर्माना

पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी के मुख्यमंत्री आवास का इस्तेमाल करने के संबंध में मांगी सूचना पर उलङो सीएम आफिस के अधिकारियों पर आरटीआई की मार पड़ी है। समय पर सूचना उपलब्ध न कराने पर सीएम आफिस के अनुसचिव पर दस हजार का जुर्माना व अपर सचिव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

देहरादून के एक अपीलकर्ता ने उस शासनादेश की प्रतिलिपि मांगी थी, जिसके तहत बीसी खंडूड़ी मुख्यमंत्री के लिए निर्धारित आवास में रह रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए अनुमन्य सुविधाओं, बीसी खंडूड़ी के सहयोगियों के नाम-पद, आवास का मासिक खर्च आदि के विषय में भी सूचना मांगी थी।

लोक सूचना अधिकारी (पीआईओ) व विभागीय अपीलीय अधिकारी के जवाब से संतुष्ट न होने पर अपीलकर्ता ने सूचना आयोग में अपील की। सुनवाई के दौरान पीआईओ ने कहा कि मांगी गई सूचना उनके कार्यालय से संबंधित नहीं थी, इस वजह से सूचना नहीं दी जा सकी। लेकिन पीआईओ संबंधित अन्य विभागों के विवरण का पता लगाने के लिए किए गए प्रयास साबित नहीं कर सके।

आयोग के नोटिस के बावजूद अपीलकर्ता को शासनादेश के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई। दोबारा अपील करने पर आयोग ने लोक सूचना अधिकारी को निर्देशित किया कि ऐसा शासनादेश अस्तित्व में न होने की सूचना भी अपीलकर्ता को देनी होगी। इसके बाद अपीलकर्ता को सूचना मिली। मुख्य सूचना आयुक्त डा. आरएस टोलिया ने विलंब से सूचना उपलब्ध कराने पर सीएम आफिस के अनुसचिव पर दस हजार जुर्माना व विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अपर सचिव के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है।

सार्वजनिक करें पूर्व सीएम से संबंधित सूचनाएं मामले की सुनवाई के दौरान सूचना आयोग ने मुख्य सचिव को निर्देशित किया है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों से संबंधित सूचनाएं सार्वजनिक की जाएं। संबंधित विभाग अपने मैनुअलों में उनसे संबंधित शासनादेशों को शामिल करें। आयोग ने ऐसी सूचनाओं को सार्वजनिक महत्व की सूचना माना है।

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