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नसीहत का इमला

हे मेरे प्रिय छुटभय्ये! तू तनाव में क्यूं है। तू मुझे भाजपा-सपा से निकाला हुआ सा लगता है। खून के घूंट मत पी। घर वापसी की अफवाहें फैला। महिला आरक्षण बिल का समर्थन कर लेकिन बच-बच के। राजनीति में कोई नया पंगा ले। गड़े मुर्दे उखाड़। तिरिया चरित्तर दिखा। भवें सिकोड़ कर दोस्ती कर। नदी में कूदना हो तो कपड़े उतारना जरूरी नहीं। कब तक कोई मंदी में बिना बिके बैठा रहे। जल्दी से प्रगतिशील होगा। ज्यादा भी मत होना वरना राजनीति छोड़ कर साहित्य ज्वाइन करना पड़ेगा। कम पैसे वाला पुरस्कार लौटाने से सिर्फ खबर बनती है। तू मर्द है तो औरत पर अत्याचार कर। बगैर शोषित हुए दलित बन। पिछड़ों का आलस्य ही पढ़े-लिखों को बामन बनाता है।
देख, महंगाई को छोड़। रिश्वत के रेट बढ़ने से संतोष कर। ज्यादा भड़क मत। भड़कना सदन में ही संवैधानिक है। सदन में उपस्थित रहने से दैनिक भत्ता जस्टीफाई होता है। जिस नेता पर कोई आरोप न हो वो गुमनाम बना रहता है। बेटा, राजनीति में सीना यूं ही चौड़ा नहीं होता। जो बदमाश एकआध दफे दरोगा को नहीं पीटता, उसकी हनक नहीं रहती। राजनीति में न्यूसेंस वैल्यू भी कोई चीज है। अखबार खरीद कर नक्कारखाना कोई यूं ही नहीं पढ़ता। उसके पीछे भी न्यूसेंस वैल्यू का हाथ है। ये वैल्यू नॉनसेंस से तो अच्छी है। नॉनसेंस दिखना है तो अश्लील विज्ञापनों से शिक्षा ले। जो नारी को उसका इच्छित नुकसान न कर सके वो अधम कोटि में आता है। संन्यास ले तो टीवी के बाबाओं जैसा। भगवान करे तेरा बुढ़ापा कथक के महाराजों जैसा कटे। अपनी नहीं दूसरों की थाली में बहता घी देख। हे अर्जुन, अमां गांडीव उठा और मार डाल अपनों को। आनंद के दाता से ज्ञान मत मांग मूर्ख। परमानंद मांग। जा।

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