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स्वदेशी हाथों में होगा गंगा सफाई का मैनेजमेंट

गंगा की सफाई अब पूरी तरह से स्वदेशी तौर तरीकों से होगी। खरबों रुपए बहाने के बाद गंगा सफाई मैनेजमेंट विदेशी हाथों से लेने की तैयारी हो रही है। अब देश के शीर्ष वैज्ञानिकों की एक समिति गंगा की सफाई के लिए ब्लू पिंट्र तैयार करेगी।

यह समिति मई के पहले सप्ताह में केंद्र सरकार को एक कार्ययोजना सौंपेगी। इसके बाद ही टेंडर पर नए सिरे से विचार होगा। इसकी पुष्टि समिति अध्यक्ष आईआईटी कानपुर के पर्यावरण विभाग के प्रोफेसर विनोद तारे ने की। उनके मुताबिक केंद्र सरकार ने प्रोजेक्ट प्रीपेरेशन फैसेलिटी (पीपीएफ) के लिए फिलहाल ग्लाबेल टेंडर प्रक्रिया स्थगित कर दी है।

नेशनल गंगा रीवर बेसिन अथॉरिटी के मैनेजमेंट का फामरूला आईआईटी के ब्लू प्रिंट से ही निकालने की कसरत हो रही है। इसकी सीधी वजह है गंगा की सफाई के लिए 25 साल से जो भी प्रयास किए जा रहे हैं वह या तो फेल हो गए हैं या फिर अधूरे छूट गए। सफाई के नाम पर खरबों रुपए बहाए गए,लेकिन गंगा निर्मल होने के वजाय और मैली हो गई।

अब प्रधानमंत्री की पहल के बाद फिर 5000 करोड़ रुपए से गंगा निर्मल करने की योजना है। इसके लिए राज्यों को गंगा बेसिन मैनेजमेंट योजना का खाका तैयार करने को कहा गया है। आईआईटी के प्रोफेसर विनोद तारे के अनुसार ग्लोबल टेंडर के फाइनल राउंड में दस कंपनियों को शामिल किया गया था, जबकि अंतिम तौर पर यूएस की मल्टी नेशनल कंपनी को जिम्मेदारी देने की योजना थी। लेकिन केंद्र ने टेंडर प्रक्रिया को स्थगित कर दिया है।

अब पर्यावरण मंत्रलय ने इस प्रक्रिया में आईआईटी से ब्लू प्रिंट माँगा है। इसके तहत कानपुर, इलाहाबाद और बनारस के लिए प्रोजेक्ट बनाए जाएँगे। इसके लिए प्रदेश सरकार ने भी संपर्क किया है। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट तैयार करने में कानपुर के साथ आईआईटी मुम्बई के प्रोफेसर यशोलेकर, आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर एके मित्तल, आईआईटी, चेन्नई, खड़गपुर, गुवाहाटी और रुड़की के प्रोफेसरों से भी मदद ली जा रही है। मई के पहले सप्ताह में ब्लू प्रिंट मंत्रलय को सौंपा जाएगा। उसी आधार पर गंगा सफाई की कार्य योजना तैयार होगी।

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  • Web Title:स्वदेशी हाथों में होगा गंगा सफाई का मैनेजमेंट