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इंटर्नशिप यानी अनुभव कमाना

कॉलेजों के सत्र लगभग खत्म होने को है और गर्मी भी बढ़ती जा रही है। स्कूल व कॉलेज के छात्र-छात्रएं जल्दी ही इंटर्नशिप व समर जॉब्स की तलाश में गैर स्वयं सेवी संगठनों के कार्यालय, रिसर्च स्कॉलरों, अखबार के दफ्तर, युवा संगठनों के ईद-गिर्द चक्कर काटते दिख जाएंगे। पर कुछ ही छात्र-छात्राएं अपने पसंद के अनुरूप इंटर्नशिप कर पाते हैं।
मुझे बीए जर्नलिज्म के दौरान रिसर्च स्कॉलर्स और विद्यार्थी संगठन दोनों के साथ काम करने का मौका मिला है। मेरा मानना है कि इंटर्नशिप करने का उद्देश्य किसी खास क्षेत्र या विषय में विशेषज्ञता रखने वाले संगठन/व्यक्ति के साथ काम करके अनुभव अर्जित करने की होनी चाहिए। हममें से अधिकतर छात्र-छात्रएं बांड यानी प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने में रुचि दिखाते हैं। हालांकि कार्यरत पेशेवरों के लिए ब्रांड नेम के साथ जुड़ना भले ही अच्छा हो पर इंटर्नशिप की बात करें तो बड़े संस्थानों में अनुभव के लिहाज से कई बार हाथ खाली ही रह जाते हैं। दूसरी ओर छोटे संस्थानों में आपको कम समय के अंदर अलग-अलग कामों की जानकारी हासिल करने का मौका मिल जाता है। यदि आप कॉलेज में पढ़ रहे हैं, तो आपका इंटर्नशिप का मकसद अधिक से अधिक सीखना होना चाहिए, शॉर्ट कट अपनाते हुए जल्द से जल्द जॉब पाना नहीं। कई बार यह उलझन भी होती है कि हम कहां आवेदन करें? इसका सबसे सीधा जवाब है कि आप अपनी रुचि से जुड़े क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों/संगठनों/कंपनी की तलाश करें। उनसे अपने मकसद के संबंध में बात करें अथवा ई-मेल के जरिए संपर्क करें। इंटर्नशिप के लिए आवेदन करते समय अधिक सरल और विनम्रतापूर्वक लिखा ई-मेल ही अक्सर काफी होता है। इंटर्नशिप के लिए जरूरी है कि आप अपनी पंसद और विशेषज्ञता के क्षेत्र में आवश्यक स्किल्स को समझते हों और उस क्षेत्र की आधारभूत जानकारी आपके पास हो। ऐसे स्थानों की खोज करें, जिनके पास युवा विद्यार्थियों के काम करने के लिए खास प्रोग्राम हों।

 

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