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बहुमुखी प्रतिभा के धनी है सतीश कौशिक

बहुमुखी प्रतिभा के धनी है सतीश कौशिक

हिन्दी सिनेमा जगत में सतीश कौशिक को बहुमुखी प्रतिभा का धनी माना जाता है उन्होंने न सिर्फ निर्माण और निर्देशन बल्कि हास्य अभिनय और लेखन में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है।
 
सतीश कौशिक का जन्म 13 अप्रैल को दिल्ली में हुआ था। बचपन से ही उनकी ख्वाहिश अभिनेता बनने की थी। उन्होंने अपनी की पढ़ाई दिल्ली के प्रसिद्ध किरोड़ीमल कॉलेज से पूरी की और इसके बाद नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला ले लिया। साल 1978 में अभिनय की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट में दाखिल हो गए।
 
सतीश कौशिक ने 1980 के दशक में अभिनेता बनने के सपने के साथ मुंबई में क़दम रखा था। अभिनेता के रूप में उन्हें 1983 में प्रदर्शित फिल्म 'मासूम' में काम करने का मौका मिला। इस फिल्म में उन्होंने निर्देशक शेखर कपूर के साथ सहायक के रूप में काम किया। मासूम को फिल्म इंडस्ट्री में एक ऐतिहासिक फिल्म के तौर पर याद किया जाता है। इस फिल्म में उर्मिला मातोंड़कर और जुगल हंसराज ने बाल कलाकार की भूमिका निभाई थी।
 
साल 1987 में प्रदर्शित फिल्म 'मिस्टर इंडिया' सतीश कौशिक के सिने करियर की महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुई। 'इनविज़िबल मैन' की कहानी पर शेखर कपूर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उन्होंने 'कैलेन्डर' नामक एक बावर्ची का किरदार निभाया और दर्शको को हंसाते हंसाते लोटपोट कर दिया।


साल 1989 में प्रदर्शित फिल्म 'राम लखन' सतीश कौशिक की महत्वपूर्ण फिल्म में शुमार की जाती है। इस फिल्म में उन्होनें अपने दमदार अभिनय से दर्शको का दिल जीत लिया और अनुपम खेर के साथ सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित भी किए गए। दिलचस्प बात है कि यह फिल्म इंडस्ट्री के इतिहास का पहला मौका था जब एक ही श्रेणी के लिए दो अभिनेताओं को फिल्म फेयर का पुरस्कार दिया गया।
 
साल 1993 में बोनी कपूर निर्मित फिल्म 'रूप की रानी चोरों का राजा' के ज़रिए सतीश कौशिक ने फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में भी क़दम रख दिया। अनिल कपूर, श्रीदेवी और जैकी श्रॉफ जैसे नामचीन सितारों की मौजूदगी के बावजूद कमज़ोर पटकथा के कारण फिल्म टिकट खिड़की पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई।
 
साल 1995 में निर्देशक के रूप में सतीश कौशिक की एक और फिल्म 'प्रेम' रिलीज़ हुई। संजय कपूर और तब्बू अभिनीत इस फिल्म के निर्माण में लगभग सात साल लग गए। जिसकी वजह से फिल्म अपना प्रभाव नही दिखा सकी और टिकट खिड़की पर बुरी तरह नकार दी गई। इससे सतीश कौशिक को गहरा झटका लगा और निर्देशक के रूप में उन्हें अपना करियर डूबता नज़र आया।

सतीश कौशिक के कैरियर का सितारा 1999 में प्रदर्शित फिल्म 'हम आपके दिल में रहते हैं' से चमका। पारिवारिक पृष्ठभूमि पर बनी अनिल कपूर और काजोल अभिनीत इस फिल्म की कहानी एक ऐसे अमीर उद्योगपति पर आधारित थी जो एक वर्ष के एग्रीमेंट पर अपनी सेक्रेटरी से शादी करता है। दर्शकों ने नए विषय पर बनी इस फिल्म को काफी पसंद किया। इस फिल्म की सफलता के बाद सतीश कौशिक निर्देशक के रूप में अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे।

साल 2000 में बोनी कपूर के बैनर तले बनी फिल्म 'हमारा दिल आपके पास है' निर्देशक के रूप में सतीश कौशिक की महत्वपूर्ण फिल्म में शुमार की जाती है। इस फिल्म में उन्हें एक बार फिर से अपने प्रिय अभिनेता अनिल कपूर के साथ काम करने का मौक़ा मिला। पारिवारिक पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में अनिल कपूर के साथ ऐश्वर्या राय की जोड़ी को दर्शको ने काफी पसंद किया और फिल्म टिकट खिड़की पर सुपरहिट साबित हुई। साल 2001 में वासु भगनानी के बैनर तले बनी फिल्म 'मुझे कुछ कहना है' बतौर निर्देशक के रूप में सतीश कौशिक की सुपरहिट फिल्मों में शुमार की जाती है। युवा प्रेम कथा पर आधारित यह फिल्म अभिनेता जीतेन्द्र के सुपुत्र तुषार कपूर की पहली फिल्म थी। फिल्म में तुषार कपूर और करीना कपूर की जोड़ी को दर्शको ने काफी पसंद किया।

साल 2003 में प्रदर्शित फिल्म 'तेरे नाम' के रूप में निर्देशक सतीश कौशिक की सर्वाधिक सुपरहिट फिल्मों में शुमार की जाती है। इस फिल्म के ज़रिए उन्होंने अभिनेता सलमान खान को नए अंदाज़ में पेश किया और उनसे संजीदा अभिनय कराकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
 
साल 2008 में सतीश कौशिक ने 1980 में प्रदर्शित फिल्म 'कर्ज़' का रिमेक बनाया। फिल्म में मुख्य अभिनेता की भूमिका में ऋषि कपूर की भूमिका को अभिनेता हिमेश रेशमिया ने निभाया लेकिन शानदार लोकेशन, दमदार संगीत और अच्छी मार्केटिंग और सतीश कौशिक के सशक्त निर्देशन के बावजूद फिल्म टिकट खिड़की पर औसत व्यापार ही कर पाई।
 
सतीश कौशिक ने दर्शको की पसंद को देखते हुए छोटे पर्दे का भी रूख किया और 'फिलिप्स टॉप टेन' में बतौर होस्ट काम करके दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। साल 2007 में अपने मित्र अनुपम खेर के साथ मिलकर उन्होंने 'करोलबाग प्रोडक्शन कंपनी' की स्थापना की जिसके बैनर तले 'तेरे संग' का निर्माण किया।

सतीश कौशिक की जोड़ी अभिनेता गोविंदा के साथ काफी पसंद की गई। यह सुपरहिट जोड़ी सबसे पहले 1990 में प्रदर्शित फिल्म 'स्वर्ग' में पसंद की गई थी। इसके बाद फिल्मकारो ने इस जोड़ी को अपनी फिल्मों में रिपीट किया। इन फिल्मों में 'साजन चले ससुराल', 'दीवाना मस्ताना', 'आंटी नंबर वन', 'बड़े मियां छोटे मियां', 'परदेसी बाबू', 'राजा जी', 'हसीना मान जाएगी' और 'क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलता' जैसी फिल्में शामिल हैं।

सतीश कौशिक दो बार फिल्म फेयर पुरस्कार से नवाज़े जा चुके हैं। उन्हें सबसे पहले 1989 में प्रदर्शित फिल्म राम लखन के लिए सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके बाद 1994 में फिल्म 'साजन चले ससुराल' के लिए भी वह फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किए गए। इसके अलावा वह एशियन अकादमी ऑफ फिल्म एंड टेलीवीज़न के बोर्ड के सदस्य भी बने।
 
सतीश कौशिक ने दो दशक के अपने सिने कैरियर में लगभग 100 फिल्मों में उत्कृष्ट निर्देशन किया। लेकिन दुर्भाग्य से वह किसी भी फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के फिल्म फेयर से सम्मानित नहीं किए गए। हालांकि साल 2003 में उन्हें फिल्म 'तेरे नाम' के लिए नामांकित अवश्य किया गया। पर इसका उन्हें कभी मलाल नहीं रहा। इन दिनों वह अपनी नई फिल्म 'मिलेंगें मिलेंगें' के निर्देशन में व्यस्त हैं।

सतीश कौशिक की कुछ अन्य फिल्में हैं- 'जाने दो भी यारो 1983', 'उत्सव 1984';'सागर 1985';'जलवा 1987'; 'डैडी','प्रेम प्रतिग्या' 1989; 'जमाई राजा' 1990; 'अंदाज़' 1994; 'मिस्टर एंड मिसेज़ खिलाड़ी' 1997; 'घरवाली बाहरवाली' 1998, 'आ अब लौट चले' 1999; 'दुल्हन हम ले जाएंगे', 'चल मेरे भाई' 2000; 'हम किसी से कम नहीं' 2002; 'आबरा का डाबरा' 2004; 'गॉड तुस्सी ग्रेट हो' 2008; 'डू नॉट डिस्टर्ब' 2009; 'अतिथि तुम कब जाओगे' 2010 आदि।

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