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आईआईटी: कुछ बदला-बदला सा

आईआईटी जेईई में इस बार काफी कुछ बदलाव रहा। प्रश्नों की संख्या, निगेटिव मार्किंग और कुछ नए फीचर्स की शुरुआत उल्लेखनीय रही। लेकिन एक जो कायम वह था आईआईटी जेईई का ट्रेंड। इस बार भी सवालों को लेकर अनिश्चितता कायम रहा और इसका सस्पेंस सवाल देखने के बाद खत्म हुआ। देश के प्रीमियर तकनीकी संस्थानों में दाखिला लेने के मकसद से रविवार को देशभर में लगभग 4 लाख 82 हजार छात्रों ने आईआईटी की प्रवेश परीक्षा दी। पटना के 32 केंद्रों पर हजारों छात्रों ने परीक्षा दी। सात आईआईटी संस्थानों के क्षेत्र में आयोजित परीक्षा में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष लगभग 82 हजार छात्र अधिक बैठे। इनमें छात्रओं की संख्या में भी इजाफा हुआ है। पिछली बार जहां छात्रएं करीब 92 हजार थी, वहीं इस बार लगभग एक लाख 10 हजार। आईआईटी संस्थानों में 10 हजार सीटें हैं। पहला पेपर कुछ राहत भरा रहा तो दूसरे ने कसर पूरी कर दी। दूसरे सत्र में भौतिकी पेपर ने छात्रों को कुछ परेशानी में डाला।

निगेटिव मार्किंग में उलटफेर
पहले पेपर के चार सेटों में से दो ही सेट्स में निगेटिव मार्किंग का प्रावधान रखा गया। सिंगल आंसर क्वेश्चन और पैराग्राफ क्वेशचन श्रृंखला के प्रश्नों की संख्या क्रमश: आठ और पांच थी। सभी प्रश्नों के लिए तीन अंक हैं, उत्तर गलत होने पर एक अंक काटा जाएगा। राहत की बात रही कि पिछली बार जहां मल्टीपल आंसर टाइप प्रश्नों को भी निगेटिव मार्किग के तहत रखा गया था, इस बार अलग कर दिया गया। इंटेनजर्स में भी निगेटिव मार्किग नहीं रखी गई। इस तरह छात्रों को एक बड़ी राहत मिली। दूसरे पेपर में बिल्कुल बदला सा नियम लागू किया गया। प्रत्येक प्रश्न के जहां कुल अंक 5 रखे गए, वहीं 2 मार्क्स निगेटिव के रखे गए।

पार्शियल मार्किंग की हुई शुरुआत
आईआईटी जेईई में इस बार एक नया कदम उठाते हुए पार्शियल मार्किंग की शुरुआत की गई है। इसके तहत अगर किसी प्रश्न के तीन जवाब सही है और छात्र दो पर ही टिक लगाकर आता है, तो उसे पार्शियल मार्किंग दी जाएगी। यह एक बड़ी राहत है।

कुल 489 अंक का रहा पेपर
सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक चले पेपर में कुल 84 (28 गुणा 3) प्रश्न पूछे गए थे, पेपर 252 मार्क्स का था, वहीं दूसरे सत्र के पेपर में महज 57 (19 गुणा 3) प्रश्न पूछे गए। दूसरे पेपर में 8-8 अंकों के मैट्रिक्स मैथ्स के दो सवाल पूछे गए। इस तरह दोनों पेपरों को मिलाकर कुल 489 अंकों के प्रश्न पूछे गए।

एनसीईआरटी पर आधारित रहा पेपर
छात्रों और विषय विशेषज्ञों के अनुसार पेपर के अधिकतर प्रश्न एनसीईआरटी सिलेबस पर आधारित था। इसके लिए कुछ अन्य किताबों से भी सवाल पूछे गए। जिन छात्रों ने सिलेबस के आधार पर तैयारी की थी और विषय को गहनता से पढ़ा था, उसके लिए पेपर आसान था। प्रश्नों ने पूरे सिलेबस को कवर किया हुआ था। पहले सत्र का प्रश्नपत्र पूरी तरह तो नहीं, लेकिन काफी हद तक बोर्ड परीक्षा के स्तर का ही था। जिन लोगों ने ऑर्गेनिक केमेस्ट्री या इस तरह के हिस्सों को छोड़ा, उनके लिए भारी पड़ा। पहले पेपर में आर्गेनिक केमेस्ट्री से ही पैराग्राफ के सवाल पूछे गए।

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