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नवीन पॉलिटेक्निक पाटलिपुत्र, स्टूडेंट्स 1500 शिक्षक मात्र 14

छात्र 1500 और शिक्षक मात्र 14। जहां 15 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए वहीं 107 छात्रों पर एक शिक्षक हैं। यानी कॉलेज में कम से कम 65 शिक्षक होने चाहिए। शिक्षकों की कमी का आलम यह है कि एक क्लास रूम में क्षमता से अधिक छात्र बैठ रहे हैं। यह हाल नवीन पॉलिटेक्निक पाटलिपुत्र का है। कॉलेज में दाखिले दिन-ब-दिन बढ़ते गए और शिक्षक धीरे-धीरे सेवानिवृत्त होते गए। शिक्षक की संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।
कई विभागों में तो शिक्षकों का टोटा है।

इलेक्ट्रॉनिक्स में शिक्षक के पांच पद हैं लेकिन पांचों पद रिक्त हैं। कंप्यूटर में 5 पद हैं और पांचों रिक्त हैं। इसी तरह सिविल व मैकेनिकल में शिक्षक के 6 -6 पद हैं लेकिन चार-चार पद रिक्त पड़े हैं। कॉलेज प्रशासन ने कई बार सरकार से शिक्षकों के अतिरिक्त पद सृजित करने का आग्रह किया है लेकिन परिणाम सिफर रहा।

कॉलेज में अभी शिक्षकों के 37 पद सृजित हैं लेकिन 23 पद रिक्त हैं। रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति के लिए बिहार लोक सेवा आयोग ने विज्ञापन निकाला था लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति अभी तक नहीं हुई है। कॉलेज में एक सत्र में 120 छात्रों के बैठने की व्यवस्था है लेकिन 400 छात्र बैठ रहे हैं। कॉलेज में अभी चार सत्र चल रहे हैं और एक बैच में करीब 360 छात्रों का एडमिशन होता है। क्लास रूम में बैठने के लिए छात्रों के बीच आपाधापी मची रहती है।

कॉलेज में अभी छात्रवास नहीं है और छात्र बाहर रहने को मजबूर हैं। पॉलिटेक्निक कॉलेज का जो अपना छात्रवास था पर उस कैम्पस को आईआईटी के हवाले कर दिया गया है। जब तक आईआईटी का अपना कैम्पस नहीं होगा तब तक पॉलिटेक्निक को छात्रवास वापस नहीं किया जाएगा। कॉलेज भवन की स्थिति भी जर्जर है और वर्षों से इसकी मरम्मत नहीं की गई है।

नवीन पॉलिटेक्निक पाटलिपुत्र के प्राचार्य सीताराम सिंह कहते हैं कि शिक्षकों के रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया है और बीपीएससी शीघ्र ही नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करेगी। अतिरिक्त शिक्षकों के पद सृजन के लिए भी सरकार के पास लिखा गया है।

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