DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बदलाव के नाम रही आईआईटी की प्रवेश परीक्षा

आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में इस बार काफी कुछ बदलाव रहा। प्रश्नों की संख्या, निगेटिव मार्किंग और कुछ नए फीचर्स की शुरुआत उल्लेखनीय रही। देश के प्रीमियर तकनीकी संस्थानों में दाखिला लेने के मकसद से रविवार को देश भर में लगभग 4 लाख 82 हजार छात्रों ने आईआईटी की प्रवेश परीक्षा दी। सात आईआईटी संस्थानों के क्षेत्र में आयोजित परीक्षा में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष लगभग एक लाख छात्र अधिक बैठे। इनमें छात्राओं की संख्या में भी इजाफा हुआ है। पिछली बार जहां छात्रएं महज 92 हजार के आसपास थी, वह संख्या इस बार लगभग एक लाख 10 हजार के आंकड़े को पार कर गई है। चंडीगढ़ से 35 परीक्षा केंद्रों पर 8 हजार से अधिक छात्रों ने परीक्षा दी। आईआईटी संस्थानों में लगभग 10 हजार सीटें हैं। पहला पेपर कुछ राहत भरा रहा तो दूसरे ने कसर पूरी कर दी। दूसरे सत्र के प्रश्नपत्र का स्टैंडर्ड अच्छा था।

निगेटिव मार्किंग में उलटफेर
पहले पेपर के चार सेटों में से दो ही सेट्स में निगेटिव मार्किंग का प्रावधान रखा गया। सिंगल आंसर क्वेश्चन और पैराग्राफ क्वेशचन श्रृंखला के प्रश्नों की संख्या क्रमश: 8 और 5 थी। सभी प्रश्नों के लिए 3 अंक हैं, उत्तर गलत होने पर एक अंक काटा जाएगा। राहत की बात रही कि पिछली बार जहां मल्टीपल आंसर टाइप प्रश्नों को भी निगेटिव मार्किंग के तहत रखा गया था, इस बार अलग कर दिया गया। इंटेनजर्स में भी निगेटिव मार्किंग नहीं रखी गई। इस तरह छात्रों को एक बड़ी राहत मिली।

दूसरे पेपर में बिल्कुल बदला सा नियम लागू किया गया। प्रत्येक प्रश्न के जहां कुल अंक 5 रखे गए, वहीं 2 मार्क्स निगेटिव के रखे गए।

पार्शियल मार्किंग की हुई शुरुआत
इस बार एक नया कदम उठाते हुए पार्शियल मार्किंग की शुरुआत की गई है। इसके तहत अगर किसी प्रश्न के तीन जवाब सही है और छात्र दो पर ही टिक लगाकर आता है, तो उसे पार्शियल मार्किंग दी जाएगी। यह एक बड़ी राहत है।

कुल 489 अंक का रहा पेपर
सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक चले पेपर में कुल 84 (28 गुणा 3) प्रश्न पूछे गए थे, पेपर 252 मार्क्स का था, वहीं दूसरे सत्र के पेपर में महज 57 (19 गुणा 3) प्रश्न पूछे गए। दूसरे पेपर में 8-8 अंकों के मैट्रिक्स मैथ्स के दो सवाल पूछे गए। इस तरह दोनों पेपरों को मिलाकर कुल 489 अंकों के प्रश्न पूछे गए।

एनसीईआरटी पर आधारित रहा पेपर
छात्रों और विषय विशेषज्ञों के अनुसार पेपर एनसीईआरटी सिलेबस पर आधारित था। जिन छात्रों ने सिलेबस के आधार पर तैयारी की थी और विषय को गहनता से पढ़ा था, उसके लिए पेपर आसान था। प्रश्नों ने पूरे सिलेबस को कवर किया हुआ था। पहले सत्र का प्रश्नपत्र पूरी तरह तो नहीं, लेकिन काफी हद तक बोर्ड परीक्षा के स्तर का ही था। जिन लोगों ने ऑर्गेनिक केमेस्ट्री या इस तरह के हिस्सों को छोड़ा, उनके लिए भारी पड़ा। पहले पेपर में आर्गेनिक केमेस्ट्री से ही पैराग्राफ के सवाल पूछे गए।

इनका कहना है
पहले सत्र की परीक्षा में जहां केमेस्ट्री और फिजिक्स के सवाल सामान्य रहे, वहीं गणित के सवालों ने छात्रों को उलझाए रखा। जिन छात्रों ने केमेस्ट्री और फिजिक्स के सवाल पहले हल किए, उनका पेपर तो राजी-खुशी बीत गया, लेकिन पहले गणित के सवालों पर हाथ डालने वालों को परेशानी झेलनी पड़ी। पहले डेढ़ घंटे गणित में ही लग जाने से कई छात्रों का फिजिक्स और केमेस्ट्री का पेपर भी फंसा। दूसरा पेपर हॉर्ड तो नहीं, लेकिन स्टैंडर्ड रहा। कैलकुलेशंस ने छात्रों को सोचने और जूझने पर मजबूर किया।
प्रो. संगीता खन्ना, विषय विशेषज्ञ

तुलनात्मक तौर पर पहला पेपर दूसरे से आसान था। पहला पेपर जहां बोर्ड परीक्षा पर आधारित रहा, वहीं दूसरा पेपर ज्यादा टफ था। छात्रों ने भी दूसरे पेपर में परेशानी आने की बात कही। दो अंक के निगेटिव मार्किंग का भय भी छात्रों के लिए परेशानी भरा रहा। प्रश्नों मे थ्योरी बेस्ड न्यूमेरिकल्स की भरमार है।
अनन्या गांगुली, विषय विशेषज्ञ

छात्रों के कोट
तैयारी के अनुरूप ही पेपर बीता है। उम्मीद है कि अच्छे अंक मिलेंगे। तैयारी पूरी तरह से एनसीईआरटी सिलेबस के आधार पर की थी, फायदा मिलता दिख रहा है।
दीपिका, छात्र

तपती गर्मी में घुमाने वाले सवाल और फिर दूसरे पेपर में मैट्रिक मैथ्स को छोड़ दे तो बाकी पेपर ठीक-ठाक ही रहा। पहले पेपर में सवाल तो अधिक थे, लेकिन हमें परेशानी ज्यादा नहीं हुई। दूसरे पेपर में सवाल कम भले ही थे, लेकिन समय कम पड़ा।
रमेश कुमार, छात्र

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:बदलाव के नाम रही आईआईटी की प्रवेश परीक्षा