DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

रजिस्ट्रेशन फार्म पर उहापोह, अधर में हजारों छात्रों का भविष्य

माध्यमिक विद्यालयों की लापरवाही और यूपी बोर्ड की सख्ती से उन विद्यालयों के हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है, जिनके पंजीकरण फार्म निर्धारित तिथि के भीतर बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में नहीं पहुंच सके हैं। अगर फार्म नहीं जमा हुए तो ये परीक्षार्थी अगले साल बोर्ड की दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में नहीं शामिल हो पायेंगे। बोर्ड प्रशासन को शासन के निर्देश का इंतजार है।

गौरतलब है कि दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने से पहले नौवीं और दसवीं में पंजीकरण फार्म (रजिस्ट्रेशन फार्म) भरना पड़ता है। नौवीं में पंजीकरण फार्म ओएमआर शीट के रूप में प्रयोग किया जाता है। यही ओएमआर शीट दसवीं में परीक्षा फार्म का रूप लेता है। यूपी बोर्ड ने इस साल के लिए पंजीकरण फार्म जमा करने की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर निर्धारित की थी। नई मान्यता वाले विद्यालयों के लिए तिथि दो बार बढ़ा 10 मार्च कर दी गई। कई बार के रिमाइंडर के बावजूद विद्यालयों ने इस मामले में उदासीनता बरती। वे निर्धारित समय के भीतर पंजीकरण फार्म नहीं जमा कर सके हैं। इसमें वाराणसी परिक्षेत्र के गाजीपुर और बलिया के विद्यालयों की संख्या अधिक है। इसके अलावा विभिन्न जिलों के भी कई विद्यालय हैं। बोर्ड परीक्षा का दौरान गाजीपुर में अनिमियतता मिलने पर माध्यमिक शिक्षामंत्री रंगनाथ मिश्र ने निर्देश दिया था कि रजिस्ट्रेशन फार्म जमा करने के लिए जमा करने के लिए जो कट आफ डेट निर्धारित किया गया था, उसका कड़ाई से पालन किया जाय। बाद में जमा हुए फार्म को स्वीकार न किया जाय। ऐसे विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई की जाय। इस कड़े निर्देश के बाद बोर्ड अधिकारी भी दवाब में हैं। दूसरी ओर विद्यालयों के प्रधानाचार्य और प्रबंधकों ने बोर्ड आफिस का चक्कर काटना शुरू कर दिया है। दूसरी ओर वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय के अपर सचिव दिव्यकांत शुक्ल का कहना है कि इस मामले में वे कुछ नहीं कर सकते। जब तक शासन की कोई गाडड लाइन नहीं आयेगी। विद्यालयों को कोई राहत नहीं मिलेगी। उन्हें रजिस्ट्रेशन फार्म जमा करने का पूरा मौका दिया गया था।

परीक्षा और परिणाम अब सब ऑनलाइन
पटना, प्रशांत कक्कड़
आखिर इंटरनेट से कितना भागिएगा। अगर अभी नहीं सीखिएगा तो आने वाले दिनों में नौकरी मिलनी मुश्किल हो जाएगी। यह सच्चाई है और इससे निपटने के लिए तैयार हो जाइए। अभी कई संस्थान ऑनलाइन फॉर्म भरवा रहे हैं। कुछ संस्थान ऑनलाइन फॉर्म के साथ ऑनलाइन एग्जाम भी ले रहे हैं। अब तो तकरीबन सभी संस्थानों के रिजल्ट भी इंटरनेट पर ही आने लगे हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया को अपनाने वाले संस्थानों की संख्या में साल-दर-साल बढ़ोतरी होते जा रही है। यहीं नहीं नौकरी में भी कंप्यूटर और इंटरनेट के नॉलेज को प्राथमिकता दी जा रही है। अब ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एआईआईएमएस) ने भी 2012 से ऑनलाइन टेस्ट लेने की घोषणा कर दी है।

ऑनलाइन के फायदे अधिक, नुकसान कम
ऑनलाइन परीक्षा के कुछ नुकसान भी हैं। लेकिन, फायदे इतने हैं कि प्रक्रिया को अपनाने में किसी को परेशानी नहीं हो रही है। कैट ने पिछले साल ऑन परीक्षा का आयोजन किया था। कई तकनीकी परेशानियां हुईं और इससे आईआईएम की खूब किरकिरी भी हुई। पर आईआईएम पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है और इसके पूरे आसार हैं कि इस बार भी ऑनलाइन परीक्षा ही होगी। असल में ऑनलाइन परीक्षा के कई फायदे हैं। सबसे पहली बात इसमें ट्रांसपैरेंसी रहती है। चीटिंग की संभावना न के बराबर रहती है। टेस्ट की प्रक्रिया और परिणाम भी जल्द आ जाते हैं।

हर परीक्षा ऑनलाइन
कैट के अलावा विदेशों के एमबीए कॉलेज में एडमिशन के लिए होने वाले जीमैट टेस्ट भी ऑनलाइन ही होता है। टॉफेल और मैट भी ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करती है। विभिन्न प्राइवेट बैंकों की परीक्षाएं भी ऑनलाइन होती है। देश की सबसे बड़ी डीम्ड यूनिवर्सिटी मणिपाल यूनिवर्सिटी भी ऑनलाइन परीक्षा लेती है।

एआईआईएमएस भी लेगा ऑनलाइन टेस्ट
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एआईआईएमएस) ने भी सभी अंडर ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और अन्य कोर्स के लिए इंट्रेंस टेस्ट 2012 से ऑनलाइन लेने का फैसला किया है। एआईआईएमएस ने इस बार से एडमिट कार्ड को साइट पर अपलोड करने का फैसला किया है। जहां से स्टूडेंट प्रिंट आउट लेकर परीक्षा में बैठ सकते हैं।

फॉर्म भी भरे जा रहे हैं ऑनलाइन
पिछले साल आईआईटी ने ऑनलाइन फॉर्म भरवाया। सभी बैंकों के आवेदन ऑनलाइन ही भरे जा रहे हैं। तकरीबन सभी एमबीए और एमसीए संस्थानों के फॉर्म ऑनलाइन ही भरे जाते हैं।

डॉ.वी.मुकुंद दास, निदेशक, सीआईएमपी कहते हैं कि ऑनलाइन प्रक्रिया के कई फायदे हैं। सबसे बड़ी बात कि इस प्रक्रिया से संस्थान को धन और कर्मचारियों की कम जरूरत पड़ती है। दिन-ब-दिन संस्थानों का ऑनलाइन प्रक्रिया के प्रति रुझान बढ़ता जा रहा है। ऐसे में छात्र-छात्राएं अधिक से अधिक कंप्यूटर और इंटरनेट के बारे में जानकारी रखें। अभिभावकों को भी इस बारे में सजग होना पड़ेगा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:रजिस्ट्रेशन फार्म पर उहापोह, अधर में हजारों छात्रों का भविष्य