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ओबामा ने मनमोहन से किया समर्थन देने का वादा

ओबामा ने मनमोहन से किया समर्थन देने का वादा

अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कहा है कि सीमा पार आतंकवाद पर उनका देश पाकिस्तान से बात कर रहा है और भारतीय शहरों पर आतंकवादी संगठनों के हमलों की साजिशों पर भारत की चिंता को वह समझता है।

विदेश सचिव निरुपमा राव के अनुसार ओबामा ने पाकिस्तानी मूल के आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली से पूछताछ के भारतीय आग्रह पर भी पूरे सहयोग का विश्वास दिलाया। हेडली इन दिनों अमेरिकी हिरासत में है।

राष्ट्रपति के अतिथि गृह ब्लेयर हाउस में रविवार को चली करीब 5० मिनट की बैठक में प्रधानमंत्री सिंह ने आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए अमेरिका का समर्थन मांगा।

राव के अनुसार प्रधानमंत्री ने ओबामा से कहा, ''हमारे क्षेत्र में आतंकवाद का खतरा है और अगर यह जारी रहता है तो हमारी प्रगति पर इसका असर पड़ सकता है। इस खतरे से कैसे निपटा जाता है, इस पर दक्षिण एशिया का भविष्य निर्भर करेगा।''

सिंह ने ओबामा से कहा कि दोनों देशों के सामने आतंकवाद का समान खतरा है। दोनों नेताओं ने अफगानिस्तान और ईरान से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की।

ओबामा ने भारत को भरोसा दिलाया कि अमेरिका सीमा पार आतंकवाद और इससे जुड़ी भारत की चिंताओं पर पाकिस्तान से बात कर रहा है।

व्हाइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रपति ओबामा ने अफगानिस्तान में भारत की नियमित मानवीय और विकास गतिविधियों का स्वागत किया। राव ने जोर दिया कि अफगानिस्तान में भारतीय भूमिका पर वाशिंगटन और नई दिल्ली में कोई मतभेद नहीं है।

प्रधानमंत्री ने ओबामा को बताया कि पाकिस्तान मुंबई हमले के गुनाहगारों को सजा दिलाने का जरा भी इच्छुक नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान की धरती से पनपने वाले आतंकवाद से निपटने की बात भी कही।

ओबामा ने प्रधानमंत्री सिंह को भरोसा दिलाया कि पाकिस्तान से गतिविधियां चलाने वाले आतंकवादी संगठन लश्कर-तैयबा से जुड़े हेडली से पूछताछ के लिए भारत के आग्रह का पूरा समर्थन करते हैं।

  ओबामा ने हेडली मसले पर सकारात्मक भरोसा दिलाया हालांकि उन्होंने इस बात के संकेत दिए कि कानूनी प्रक्रिया की वजह से पूछताछ में अभी वक्त लग सकता है।

राव ने बताया, ''हेडली से पूछताछ की हमारी मांग के प्रति अमेरिकी का रुख पूरी तरह सहयोगात्मक है। कानूनी प्रक्रिया के तहत अमेरिकी इस संबंध में कार्रवाई कर रहे हैं।''

हेडली मुंबई हमलों का प्रमुख आरोपी है और वह इस बारे में अपने गुनाह अमेरिकी अदालत के समक्ष स्वीकार कर चुका है।

वार्ता में शरीक हुए भारत के आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन, विदेश सचिव निरूपमा राव, अमेरिका में भारत की राजदूत मीरा शंकर और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

अमेरिकी शिष्टमंडल में विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेम्स जोन्स, दक्षिण एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री रॉबर्ट ब्लेक और वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

ओबामा ने सिंह से मुलाकात के दौरान यह भी कहा कि अमेरिका पाकिस्तान की मिलने वाली सैन्य मदद की कड़ाई से निगरानी करेगा।

राव के मुताबिक ओबामा ने प्रधानमंत्री सिंह से कहा,  ''पाकिस्तानी को दी जानी सैन्य सहायता की निगरानी की जा रही है और भारत के हित के मद्देनजर इस पर निगरानी जारी रहेगी।''

परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर हुई इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी चर्चा की। ईरान पर नए सिरे से प्रतिबंधों को लगाने पर ओबामा ने भारत के सहयोग लेने की कोशिश की।

इस मसले पर प्रधानमंत्री ने संतुलित रुख दिखाते हुए कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है लेकिन इसका हल वार्ता और कूटनीति के जरिए होना चाहिए।

इससे पहले परमाणु हथियारों को आतंकवादियों की पहुंच से दूर रखने पर एक समझौता करने के लिए सोमवार को वाशिंगटन में अभूतपूर्व परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन शुरू हुआ।

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित 47 देशों के नेता इस सम्मेलन में ऐसा समझौता तैयार करने के लिए एकत्र हुए हैं जिससे परमाणु हथियारों को आतंकवादियों के हाथों में जाने से रोका जा सके।

सम्मेलन ओबामा की इस चेतावनी के साथ शुरू हुआ है कि अलकायदा जैसे आतंकवादी संगठन अपने को परमाणु हथियारों से लैस करने की महत्वाकांक्षा रखते हैं।

राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों के इस सम्मेलन को विश्व के सबसे बड़े सम्मेलन के रूप में परिभाषित किया जा रहा है जो पांच दशक से अधिक समय के बाद अमेरिका द्वारा आयोजित किया जा रहा है।

सम्मेलन के मेजबान ओबामा इसमें शामिल हुए राष्ट्र प्रमुखों के साथ रात्रिभोज में बात करेंगे कि लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि परमाणु प्रसार को रोकने के लिए व्यापक या नयी साहसिक पहल की उम्मीद नहीं है।

सामरिक संवाद के लिए राष्ट्रीय उप सलाहकार बेन रोडेस ने टेलीफोनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह रात्रिभोज परमाणु आतंकवाद के खतरे के समाधान के प्रति समर्पित होगा।

ओबामा सम्मेलन के मद्देनजर पहले ही यह चेतावनी दे चुके हैं कि अलकायदा जैसे आतंकी संगठन परमाणु हथियार या जनसंहार के अन्य हथियार हासिल करने की प्रक्रिया में हैं और उन्हें इनका इस्तेमाल करने में कोई शिक्षक नहीं होगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने सम्मेलन के लिए यह आवाज रविवार रात प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ मुलाकात के दौरान उठाई। ओबामा ने चार साल के भीतर विश्व की पूरी परमाणु सामग्री की सुरक्षा सुनिश्चत करने का लक्ष्य तय किया है।

बातचीत में परमाणु हथियार हासिल करने के ईरान के प्रयासों तथा उत्तर कोरिया के परमाणु जखीरे और परमाणु हथियार संबंधी सामग्री तथा प्रौद्योगिकी के निर्यात को रोकने का मुद्दा भी अहम होगा।

रात्रिभोज से पहले ओबामा सम्मेलन में शामिल होने आए प्रत्येक नेता का औपचारिक स्वागत करेंगे। उन्होंने कहा हमारा विश्वास है कि सम्मेलन सामूहिक कार्रवाई की ओर प्रेरित करने के लिए अत्यावश्यक है जिससे अमेरिकी लोगों तथा वैश्विक सुरक्षा के लिए सबसे बड़े खतरे से निपटा जा सके क्योंकि यह परमाणु हथियार हासिल करने की आतंकवादियों की क्षमता और हमारे तथा विश्व के किसी भी शहर में इनके इस्तेमाल से संबंधित है।

रोडस ने कहा कि तत्काल विनाश और जनहानि, दोनों के संदर्भ में स्पष्ट तौर पर इसके घातक परिणाम होंगे और सक्रिय परमाणु आतंकवाद के बाद इससे वैश्विक सुरक्षा माहौल के लिए भी जटिलताएं पैदा होंगी।

रोडस ने कहा कि इसलिए कल (मंगलवार) की रात इस खतरे को लेकर आम राय बनाने के लिए राष्ट्रपति प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों से चर्चा करेंगे, ताकि खतरे को लेकर उनका रुख जाना जा सके और नि:संदेह इस बारे में कि इसका मुकाबला करने के लिए क्या किए जाने की जरूरत है।

दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के अंत में विश्व नेताओं द्वारा एक दस्तावेज जारी किए जाने की संभावना है जिसमें परमाणु आतंकवाद को गंभीर खतरा माना जाएगा और चार साल के भीतर सभी संवेदनशील परमाणु सामग्री को सुरक्षित करने की बात कही जाएगी।

राष्ट्रपति के वरिष्ठ सलाहकार और परमाणु अप्रसार मामलों के वरिष्ठ निदेशक गैरी सैमूर ने कहा कि विश्व नेताओं की ओर से एक उच्चस्तरीय दस्तावेज जारी होगा जिसमें परमाणु आतंकवाद को गंभीर खतरे के रूप में मान्यता दी जाएगी और यह चार साल के भीतर सभी संवेदनशील परमाणु सामग्री को सुरक्षित करने के राष्ट्रपति के प्रयासों का समर्थन करेगा।

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