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‘चैनलों के लिए दिशा-निर्देश सहमति के बाद ही’

सूचना एवं समाचार माध्यमों पर किसी तरह का कोई अंकुश लगाने का सरकार का कोई इरादा नहीं है और आपातस्थितियों के लाइव कवरेज के संबंध में चैनलों के लिए कोई दिशानिर्देश भी सभी संबद्ध पक्षों से अधिकतम संभव सलाह-मशविरे के बाद ही जारी किया जाएगा। केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण रायमंत्री आनंद शर्मा ने लोकसभा में बुधवार को खासकर 26 नवंबर के मुम्बई हमलों के लाइव कवरेज पर सदस्यों के सवालों पर प्रशनकाल में लोकसभा को यह आश्वासन दिया। उन्होंने मुंबई हमलों जैसी आपातकालीन स्थितियों में कवरेज की एक सैद्धांतिकी एवं मानदंड की आवश्यकता बताते हुए कहा कि आतंकवादी गतिविधियों का सामना करने वाले सभी देशों को ऐसी व्यवस्थाएं करनी पड़ती है और ब्रिटेन में लंदन तथा स्पेन में मैड्रिड की आतंकवादी घटनाआें के बाद जारी कवरेज नियमन संबंधी निर्देश इसके प्रमाण है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने सरकारी अंकुश की किसी भी गुजांइश से साफ इंकार करते हुए कहा कि इसका कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। यद्यपि मुंबई हमलों के कवरेज के संबंध में सदस्यों के सरोकारों से सहमति जताते हुए उन्होंने कहा कि इनका समाधान चैनलों की आत्म नियमन व्यवस्था से ही हो सकता है। शर्मा ने बताया कि हमले के तुरंत बाद नवंबर में ही सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के संपादकों एवं अन्य सभी पक्षों की बैठक बुलाई और बैठकों के सिलसिले के बाद प्रसारकों के प्रमुख संगठन नेशनल ब्रॉडकास्टिंग एसोसिएशन एक आत्म नियमन तंत्र बनाने में कामयाब भी हुआ। उन्होंने आशा जताई कि यह तंत्र इस समस्या से निबटने की दिशा में कारगर साबित होगा, यद्यपि बीजू जनता दल के भर्तृहरि महताब ने याद दिलाया कि करगिल युद्ध के बाद भी चैनलों ने अपने लिए ऐसे ही दिशा-निर्देश बनाए थे, लेकिन उनका कभी पालन नहीं हुआ।ड्ढr ड्ढr महताब ने अखबारों, पत्रिकाआें के लिए मौजूद भारतीय प्रेस परिषद की तर्ज पर इलेक्ट्रानिक मीडिया समेत पूरे समाचार माध्यम के लिए एक मीडिया परिषद बनाने की भी मांग उठाई और लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने इसी बीच प्रेस परिषद के पास कोई नख दंत नहीं होने की टिप्पणी कर ऐसे निकायों को अधिक अधिकार देने की भी जरूरत रेखांकित कर दिया।

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