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बच्चे भी भुगत रहे हैं युद्ध का खामियाजा

श्रीलंका में चल रहे संघर्ष का खामियाजा हाारों बच्चों को भी भुगतना पड़ रहा है, इस युद्ध के लिए वे कतई जिम्मेदार नहीं हैं। लिट्टे द्वारा अपनी सेना में बच्चों की भर्ती और हाारों बच्चों के युद्ध में मरने या घायल होने पर यूनिसेफ ने गहरी चिंता व्यक्त की है। श्रीलंका में यूनिसेफ के प्रतिनिधि फिलिप दौमले ने कोलंबो में कहा कि हमार पास इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि आम नागरिकों को लिट्टे जबरन अपनी सेना में भर्ती कर रहा है। 14 साल तक के बच्चों को युद्ध में झोंका जा रहा है। एसे बच्चे शारीरिक शोषण, मानसिक आघात और मौत का सामना कर रहे हैं। उनका बचपन डर से भर गया है। यूनिसेफ ने कहा कि श्रीलंका के वाणी नामक उत्तरी क्षेत्र में हाारों बच्चों का घायल होना गहन चिंता का विषय है। फिलिप दौमले ने कहा कि युद्ध के कारण बच्चे रोमर्रा की जरूरतों से वंचित हैं। वे बड़ी संख्या में मार जा रहे हैं और घायल हो रहे हैं। हाारों बच्चे बेघर और अपनों से अलग हो चुके हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस क्षेत्र के ज्यादातर बच्चे जलने, हड्डी टूटने या गोली के घाव के शिकार हैं। इस लड़ाई में घायल होने वाले बच्चों में कुछ माह के शिशु भी शामिल हैं। कई बार यूनिसेफ श्रीलंका सरकार और लिट्टे से बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील कर चुका है। पिछले दिनों यूनिसेफ के दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय निदेशक डेनियल टूल ने कहा था कि उनके संगठन के पास बच्चों के युद्ध की चपेट में आने, घायल होने और मरने के पुख्ता प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों और चिकित्सालयों को शांति क्षेत्र मानकर उनकी सुरक्षा की जानी जरूरी है।

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