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शिखर बैठक का नेतृत्व करेंगे ओबामा

शिखर बैठक का नेतृत्व करेंगे ओबामा

अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा सोमवार से शुरू हो रही दो दिवसीय शिखर बैठक का नेतृत्व करेंगे जिसमें परमाणु सामग्री के असुरक्षित जखीरे के चलते उत्पन्न खतरे पर गहन विचार विमर्श किया जाएगा।

वाशिंगटन के इतिहास में अब तक के इस सबसे बड़े जमावड़े की अगुवाई करने वाले ओबामा ने मात्र पांच साल पहले वर्ष 2005 में बतौर इलिनॉय के जूनियर सीनेटर रूस, यूक्रेन और अजरबैजान स्थित शीत युद्ध दौर के सबसे भयावह शस्त्र स्थलों का अपने वरिष्ठ साथी इंडियाना के सीनेटर रिचर्ड जी़ लुगर के साथ दौरा किया था। लेकिन अब वह बतौर अमेरिकी राष्ट्रपति इस मामले पर पहल कर रहे हैं।

पिछले वर्ष ओबामा ने प्रण किया था कि वह परमाणु हथियारों को हटाने की दिशा में काम करेंगे। कुछ ही महीनों बाद उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा हुई। ओबामा ने परमाणु आतंकवाद को विश्व सुरक्षा के समक्ष मौजूद सबसे सन्निकट और चरम खतरा करार दिया है।

ओबामा के सहयोगी रेखांकित करते हैं कि अलकायदा ने परमाणु बम हासिल करने की असफल कोशिश भी की है। वाशिंगटन पोस्ट ने खबर दी कि लेकिन ओबामा की मुख्य चुनौती दूसरे देशों से वाशिंगटन आए 46 नेताओं या उनके प्रतिनिधियों को इस बात के लिए राजी करने की होगी कि ऐसी सामग्री की हिफाजत की जाए, जिसका इस्तेमाल बम बनाने में किया जा सकता है।

अखबार ने परमाणु सुरक्षा पर शिखर बैठक से पहले अपनी खबर में कहा कि यह आसान नहीं होगा। बूज एलेन हेमिल्टन में सहयोगी और अप्रसार मामलों की विशेषज्ञ एलिजाबेथ टरपेन के हवाले से वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा कि मेड इन यूएसए का ठप्पा लगने से यह जरूरी नहीं कि दूसरे देश इस खतरे को समक्ष ही लेंगे।

अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए अपने अभियान के दौरान ओबामा ने प्रण किया था कि वह अपने पहले कार्यकाल में दुनिया भर में मौजूद असुरक्षित परमाणु सामग्री की हिफाजत के दायरे में लाने की कोशिश करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ओबामा की रफ्तार इस उद्देश्य को हासिल करने के अनुकूल नहीं है।

शिखर बैठक से पहले ओबामा प्रशासन ने नया नीति वक्तव्य न्यूक्लियर पोस्चर रिव्यू जारी किया जो नए हथियारों का विकास रोकने और अमेरिका के पास पहले से मौजूद हथियारों के इस्तेमाल को सीमित रखने के बारे में है। इस नई नीति के तहत ओबामा ने प्रण किया कि वाशिंगटन ऐसे किसी भी राष्ट्र के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेगा जो परमाणु अप्रसार संधि का अनुपालन करते हैं।

वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, यह शिखर बैठक ओबामा के कूटनीतिक दृष्टिकोण की एक परीक्षा होगी, जिसमें अक्सर दूसरे देशों के लिए यह जरूरी होता है कि वे अपने अहम राष्ट्रीय हितों को दरकिनार करें ताकि साक्षा अंतरराष्ट्रीय हित साधे जा सकें।

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