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प्रदूषण पर सख्त हो रहा प्रशासन

सांस लेने के लिए शहर में अब आपको स्वच्छ हवा मिलेगी। प्रदूषण फैलाने वालों की श्रेणी में अव्वल ऑटो बाय-बाय कहेंगे। लोगों की सहूलियत के लिए बैट्री रिक्शा के रूप में इसका विकल्प तलाशा जा रहा है। जो कम किराये पर गलियों में सवारियों को छोड़ते नजर आएंगे।

सिटी बसों के फैलते जाल तथा यूरो-तीन तक की गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन पर प्रतिबंध लगाने की चल रही तैयारी बेहतर पर्यावरण बनाने का संकेत दे रही है। ग्रामीण क्षेत्र में भी परिमट पर चलाई जाने वाली करीब 150 बसें अपने रूट से ऑटो का सफाया कर देंगी। थर्मल पावर प्लांट भी शहर को अलविदा कहने की दहलीज पर खड़े हैं। सब कुछ होने के बाद प्रदूषित दस शहरों में शुमार शहर जल्द इस श्रेणी से बाहर निकल जाएगा।

देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित दस शहरों में फरीदाबाद का नाम शुमार है। राष्ट्रमंडल खेलों से पहले इसको कम करने के लिए केंद्र व राज्य सरकारें मसक्कत कर रही हैं। स्थानीय निकाय भी इसमें भाग लेने जा रहा है। बैट्री से चलने वाले रिक्शा से इसकी शुरुआत करने की तैयारी निगम में चल रही है।

नगर निगमायुक्त ने उपायुक्त को पत्र लिखकर ऐसे दस गरीब रिक्शा चालकों के नाम मांगे हैं जिनको बैट्री से चलने वाले रिक्शा मुफ्त दिए जा सकें। इनके सड़क पर उतरने के बाद बाकी के रिक्शा चालक इस तकनीक की तरफ आकर्षित होंगे। देखते ही देखते खींचने वाले रिक्शा सड़कों से लुप्त हो सकते हैं। संभावना है। बीस किलोमीटर प्रति घंटा की गति से दौड़ने वाले इन रिक्शों का असर ऑटो रिक्शा पर पड़ेगा। इसके पीछे पर्यावरण सुधारने की मंशा है।

परिवहन विभाग ने ग्रामीण क्षेत्र के रूटों पर निजी बस दौड़ाने के लिए परमिट देने का फैसला किया है। अधिकांश रूटों पर ऑटो का ही राज है। डीजल से चलने वाले ऑटो वायु के साथ ध्वनि प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं। नई बसों के उतरने के बाद इनकी मांग कम होने की संभावना है। प्रदूषण फैलाने में भूमिका अदा करने वाले थर्मल पावर प्लांट शहर को अलविदा कहने की दलहीज पर हैं।

परिवहन विभाग ने यूरो-चार वाहनों का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया। यूरो-तीन तक की गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन बंद करने की कवायद शुरू हो गई है। एक अवधि से पहले बने ऐसे वाहनों का रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया जाएगा। सिटी बसों की गति तेज हो गई है। लिंक रोड तक सर्विस देने के लिए इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। सस्ते रेट पर सफर करके लोग धीरे-धीरे ऑटो से किनारा कर लेंगे। सीएनजी स्टेशनों की बढ़ता संख्या से संकेत मिल रहे हैं कि डीजल के ऑटो को हटाने की तरफ सरकार भी गंभीरता से कदम उठा रही है।

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