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नाराज किसानों ने फिर से काम रोकने की ठानी

ग्रेनो अथॉरिटी की आबादी निस्तारण नीति से किसान नाखुश हैं। आबादी और भूमि अधिग्रहण के लिए तैयार साझा फॉर्मूले में नजरअंदाज किए जाने से गुस्साए किसानों ने दोबारा काम रोकने का निर्णय लिया है। किसानों का कहना है कि अथॉरिटी ने जिन गांवों का सर्वे किया है, उनकी सूची अभी तक नोटिस बोर्ड पर चस्पा नहीं की गई है।

किसान इसे धोखा बता रहे हैं। भूमि अधिग्रहण प्रतिरोध आंदोलन समिति के प्रवक्ता रूपेश वर्मा ने बताया कि अथॉरिटी गुमराह कर किसानों के आंदोलन को दबाना चाहती है। यदि अथॉरिटी किसानों की समस्या का निस्तारण करना वास्तव में करना चाहती है तो आबादी का सर्वे गांव-गांव जाकर होता,न कि एसी आफिस में बैठ निर्णय लेकर।

किसानों ने किस गांव की कितनी आबादी छोड़ी गई है, उसकी सूची तैयार करके नोटिस बोर्ड पर चस्पा हो। किसानों का कहना है कि अथॉरिटी ने समस्या निस्तारण के लिए जो समय लिया था,वह पूरा हो रहा है। अब किसान आर पार की लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उधर यमुना अथॉरिटी के किसानों का धराना लगातार जारी रहा। किसान दिन रात एक कर धरना दिए बैठे हैं। किसानों ने खाने पीने व सोने का धरना स्थल पर ही इंतजाम कर रखा है। 

जमीन अधिग्रहण प्रतिरोध आंदोलन समिति के संयोजक सरदाराम वर्मा का कहना है कि अथॉरिटी ने वायदे के मुताबिक, किसानों के छह प्रतिशत आबादी के प्लाट आवंटित नहीं किए, जबकि किसानों की जमीन को अधिग्रहण किए हुए दस साल हो गए हैं। तीन हजार से ज्यादा किसान छह प्रतिशत आबादी के प्लाटों के लिए अथॉरिटी के चक्कर काट रहे हैं। एक ओर तो अथॉरिटी बिल्डरों को जमीन दे रही है तो दूसरी किसानों के आबादी के प्लाट देने के नाम पर जमीन नहीं होने का बहाना बना रही है।

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