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संक्षिप्त खबर

भाजपा से तुलनाड्ढr भाजपा के घेरा डालो,डेरा डालो कार्यक्रम की तुलना लोग झाविमो के कार्यक्रम से कर रहे थे। लोग उत्सुकता से पूछ रहे थे कि बाबूलाल कहीं भाजपा पर बीस तो नहीं पड़े। वहीं झाविमो के नेता-कार्यकर्ता सफाई देने में जुटे थे कि उनका कार्यक्रम कहीं बेहतर रहा। सुरक्षा में लगाये गये पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी तुलना करने में ही व्यस्त थे। लगभग ढाई बजे कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर जब पुलिस उन्हें धुर्वा स्टेडियम कैम्प जेल ले गयी, तो वहां संख्या प्रभावी दिखी। वैसे राजभवन के पास कहीं कोई तनावपूर्ण स्थिति नहीं दिख रही थी। लोग आराम से आना- जाना कर रहे थे। जाम की स्थिति भी 12 की तरह नहीं थी।ड्ढr पुलिस थी रिलैक्सड्ढr झाविमो के घेरा डालो, डेरा डालो कार्यक्रम के दौरान पुलिसकर्मी पूरा रिलैक्स दिखे। उन्हें राजभवन के किसी भी गेट पर झाविमो कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए जबरदस्ती नहीं करनी पड़ी। पांचों गेट से कुछ दूरी पर लगाये गये बैरिकेडिंग के पास पुलिस ने झाविमो कार्यकर्ताओं को रोक दिया और वे वहीं पर आराम से बैठ गये। उसके बाद तो पुलिसकर्मी निश्चिंत हो गये और नेताओं ने वहीं पर भाषण दिया। फिर जब वे थक गये, तो इधर-उधर घूमने लगे, उत्साह कम हो गया, तो गिरफ्तारी की रस्म अदायगी पूरी की गयी। नोंक-झोंक, धक्का मुक्की नहीं हुई।बज रहा था टेपड्ढr राजभवन के घेराव कार्यक्रम के दौरान झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी का टेप किया हुआ भाषण का कैसेट बज रहा था।ड्ढr खूब हुआ नाच-गानड्ढr घेराव के दौरान झाविमो नेताओं-कार्यकर्ताओं ने यूपीए, एनडीए और राज्यपाल के विरोध में नारबाजी तो की ही, पर उससे ज्यादा नाच-गान करके मनोरांन किया। इसमें बाबूलाल मरांडी से लेकर अन्य छोटे-बड़े नेता भी शामिल हुए। नागाबाबा खटाल के समक्ष जमकर नाच-गान हुआ। 26-27 को भाजपा उम्मीदवारों का फैसलाड्ढr रांची। भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की 26 फरवरी से दिल्ली में बैठक होगी। इसमें झारखंड की शेष बची 10 लोकसभा सीटों के लिए प्रत्याशी पर फैसला होगा। झाविमो के साथ गठबंधन को लेकर जारी बातचीत टूटने के कारण इस बार प्रत्याशियों पर फैसला हो जाने की संभावना है। वहीं, जदयू के साथ अभी भी गठबंधन को लेकर स्थिति साफ नहीं है।ड्ढr सूत्रों के अनुसार जदयू चतरा, पलामू की सीट पर दावेदारी कर रहा है। पलामू से जहां राधाकृष्ण किशोर दावेदार हैं, वहीं चतरा में इंदरसिंह नामधारी को लेकर खींचातानी की स्थिति है। जानकारों के अनुसार नामधारी वहां से जदयू टिकट पर नहीं लड़ना चाहते, जबकि जदयू के शीर्ष नेता टिकट देने पर भाजपा को हड़का रहे हैं। इस कारण पूरा मामला फंसा है। 27 तक इन सब विवादों के निपटार की उम्मीद भाजपा नेता कर रहे हैं। (हिब्यू)

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