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क्रय केंद्रों में सन्नाटा, मंडी में रौनक

किसानों का रुख सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों में कम दिखाई दे रहा है। इससे केंद्रों में तैनात कर्मी दिनभर खाली बैठे रहते हैं। अलबत्ता आढ़तियों के यहां फसल जमकर आ रही है। प्रशासनिक अधिकारी भी केंद्रों का जायजा ले रहे हैं।

अबकी तराई में गेहूं की पैदावार अच्छी हुई है। किसानों ने करीब 95 हेक्टेयर में गेहूं की फसल बोई थी। किसानों से गेहूं खरीदने के लिए शासन ने एक अप्रैल से जिले के विभिन्न स्थानों में 144 क्रय केंद्र स्थापित कर दिये थे। इनमें खाद्य विभाग के आठ, एफसीआई के 15 तथा सहकारिता विभाग के 121 केंद्र हैं। समर्थन मूल्य 1100 रु पये होने के बावजूद खरीद केंद्रों पर रौनक नहीं आ पा रही है।

जिला सहायक निबंधक यूएस सैनी के अनुसार जिले में गेहूं खरीद का लक्ष्य 6.50 लाख कुंतल दिया गया हैं। 10 दिन बीतने के बावजूद अभी तक महज 10 हजार कुंतल गेहूं की खरीद ही हो पायी है। गल्ला मंडी स्थित सहकारिता के क्रय केंद्र पर अब तक महज 401 कुंतल गेहूं खरीदा गया है। यहीं स्थित आरएफसी के क्रय केंद्र में अभी तक एक दाने की भी खरीद नहीं हो पायी।

इधर मंडी में आड़तियों के यहां रौनक बनी हुई है। मंडी में गेहूं का अधिकतम दाम 1020 रु पये प्रति कुंतल चल रहा है। किसानों को नकद धनराशि मिलने से वह बिचौलियों को ही गेहूं बेच रहे हैं। इधर शनिवार को उपजिलाधिकारी पीसी दुम्का ने भी खरीद केंद्रों का जायजा लिया।

खाद्य आपूर्ति मंत्री दिवाकर भट्ट ने किसानों को किसी तरह की समस्या होने पर कार्रवाई की चेतावनी से प्रशासनिक अमला चुस्त है। लेकिन क्रय केंद्रों की ओर किसान दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार मंडी में अब 80 हजार कुंतल से अधिक की खरीद हो चुकी है। 

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