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भारतीय वैज्ञानिकों ने खींचा टीबी के जिनोम का खाका

भारतीय वैज्ञानिकों ने खींचा टीबी के जिनोम का खाका

देश भर के सैंकड़ों वैज्ञानिकों ने तीन दिन तक कनेक्ट 2 डिकोड (सी2डी) सम्मेलन में जी तोड़ मेहनत की और पहली बार तपेदिक के जिनोम का विस्तृत खाका तैयार कर डाला। इस बीमारी से हर साल 17 लाख लोगों की मौतें होती हैं।

शैक्षणिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की ओपेन सोर्स ड्रग डिस्कवरी (ओएसडीडी) पहल के तहत तैयार किए गए टीबी के जीनों का खाका दवा बनाने वाली कंपनियों के लिए मुफ्त उपलब्ध होगा। सीएसआईआर के महानिदेशक समीर ब्रहमचारी ने बताया कि उपेक्षित रोगों के लिए दवा और चिकित्सीय तकनीकों के विकास के लिए ओपेन सोर्स मॉडल का पूरा उपयोग करने और लोक स्वास्थ्य के साथ शोध और विकास के गठजोड़ के लिए सी2डी के प्रयासों की शुरूआत को दिखाता है।

उन्होंने बताया कि सी2डी की खोज टीबी के अनछुए राज को सामने ला सकता है जिससे भारत और अन्य विकासशील देशों में इस बीमारी के लिए निहायत जरूरी दवाओं के निर्माण का मौका मिलेगा। उन्होंने बताया कि हालांकि टीबी के जीन की सीक्वेंसिंग एक दशक पहले की जा चुकी है लेकिन कभी भी 4000 के करीब जीनों में हजार से ज्यादा का एनोटेशन नही हुआ। पहली बार वैज्ञानिकों ने पूरे 4000 जीनों का पूरा एनोटेशन किया।

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