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कुमाऊं में 15 से और झेलनी होगी कटौती

पहले से छह से 12 घंटे की कटौती ङोल रहे कुमाऊंवासियों को 15 अप्रैल से और ज्यादा कटौती ङोलनी होगी। वजह पिछले महीनों में पावर कारपोरेशन ने दिल्ली और गुजरात से जो 300 एमयू बिजली उधार ली थी, उसे दो एमयू प्रतिदिन से लौटाना होगा। इस हिसाब से करीब डेढ़ महीने का वक्त लग सकता है, जिससे कुमाऊं में बिजली कटौती के घंटे बढ़ना तय है।

ऋषिकेश नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के मुताबिक रविवार को जल विद्युत परियोजनाओं से 8.5 एमयू बिजली उत्पादन हुआ। इसमें हिमाचल प्रदेश से 0.63 एमयू शेयर है। सेंट्रल सेक्टर से 10.6 एमयू बिजली मिली। नियंत्रण कक्ष के अधिकारियों का कहना है कि पिछले महीनों में पावर कारपोरेशन ने गुजरात में अडानी और एनवीवीएन और दिल्ली में बीएसईएस से 300 मिलियन यूनिट बिजली उधार ली थी। अब 15 अप्रैल से इन दोनों स्नोतों को रोजाना दो एमयू के हिसाब से बिजली लौटानी होगी।

ऐसे में बिजली कटौती के घंटे बढ़ाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प पावर कारपोरेशन के पास नहीं है। नियंत्रण कक्ष के अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल जाड़ों में बर्फबारी कम होने से इस साल  इस गर्मी भरे मौसम में नदियों का जल स्तर नहीं बढ़ पाया है। ऐसे में जल विद्युत परियोजनाओं से किसी सूरत में उत्पादन बढ़ने की उम्मीद नहीं है। उधर तापमान के बढ़ने के कारण दिनों दिन बिजली की मांग बढ़ती जा रही है। रविवार को नियंत्रण कक्ष के निर्देश पर पावर कारपोरेशन ने हल्द्वानी में दो चरणों में बिजली कटौती की।

पहले चरण में सुबह 8.01 बजे से 10.05 बजे तक और दूसरे चरण में दोपहर 12.25 से अपराह्न् 3.30 बजे तक बिजली कटौती की गई। इसके अलावा लोहे की भट्टियों यानी फरनेस में 12 घंटा और बड़े उद्योगों में आठ घंटा बिजली कटौती की गई। इससे उद्योगों में उत्पादन पर तो असर पड़ा ही साथ ही पहाड़ों और भाबरी क्षेत्र में पानी के लिए हाहाकार मचा रहा। जल संस्थान के ट्यूबवेल्स से लगे ओवरहैड टैंक कटौती के कारण नहीं भर पा रहे हैं।

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