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सट्टे का सुख

दुनिया जानती है सरकार नामक शै जिसे जितना प्रतिबन्धित करे, उसका प्रचलन उसी अनुपात में बढ़ता है। सरकार ने एक किताब पर रोक लगाई, किताब बैस्ट-सैलर बनी। सरकार ने नशा-बंदी की। पीने वालों की तादाद दिन दूनी, रात-चौगुनी हुई। इसी प्रकार सरकार ने सट्टे पर रोक लगा दी। हमें तो लगने लगा है कि सरकार के आका जब किसी पुस्तक, परम्परा-प्रवृत्ति, आदत-लत को प्रोत्साहित करना चाहते हैं तो उस पर रोक लगा देते हैं।
दहेज की सौदेबाजी, खरीद-फरोख्त से कौन वाकिफ नहीं है? जब से दहेज निरोधक कानून बना है, रकम में इजाफा ही हुआ है। अब दूल्हों का रेट खासा महंगा है। लोग कहते हैं कि भैया, कानूनन अपराध कर रहे हैं। पकड़े गये तो पुलिस से लेकर कौन कहे, कहां-कहां खिलाना पड़े। वर्तमान की रीत है। शातिर बदमुजन्ना का बाल भी बांका नहीं होता। सजा का प्रावधान बेगुनाहों के लिये है। ऐसे ही धुरन्धर मैच फिक्सर भी हैं। देश में क्रिकेट के खिलाड़ी लाखों-करोड़ों में खेलते हैं। कोई पूछे, फिक्सिंग में कितने जेल गये? कुछ पर बैन लगा। कुछ सांसद बने। पहले मैच करते थे, अब जनता को फिक्स करेंगे! कभी न खेलने की खाई, अब टीवी पर बोलने की कमाई खा रहे हैं।
सरकार हर प्रकार के अजीबो-गरीब टैक्स लगाती है। एक बेटिंग टैक्स भी लगा दे। जो जीते ईमानदारी से सरकार को उड़ाने के लिये दान दे दे। जनता भी इस रोचक खेल में हिस्सा ले। दस ओवर में कितने छक्के-चौके पड़ेंगे? फलाना पचास पर आउट होगा कि उसके पहले? सानिया की शादी सौ-एब मियां से होगी कि नहीं? बस पैन-नम्बर देना लाजिमी हो। बोली के दौरान आयकर निरीक्षक भी हाजिर रहे। आय है तो निरीक्षक का निजी कर भी होना ही होना!

 

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