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एवरेस्ट की ऊंचाई

यह सब जानते हैं कि एवरेस्ट दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत शिखर है, लेकिन उसकी ऊंचाई कितनी है? इस मुद्दे पर विवाद है, यहां तक कि नेपाल और चीन के बीच यह समझौता हुआ है कि दोनों देशों में मान्य दोनों ही अलग-अलग ऊंचाइयों को मान लिया जाए। नेपाल के मुताबिक एवरेस्ट की ऊंचाई समुद्र सतह से 8448 मीटर है, जो कि 1831 के ब्रिटिश सर्वे के आधार पर है। चीन ने 1995 में एक दल एवरेस्ट की ऊंचाई नापने को भेजा जिसने बताया कि एवरेस्ट की ऊंचाई 8444.83 मीटर है। अगर हम कहें कि चीन की गणना ज्यादा सही है क्योंकि वह बाद की है तो अमेरिकियों ने अत्याधुनिक यंत्रों से 1996 में गणना की थी और ऊंचाई 8850 मीटर निकली। वैसे दो-चार मीटर इधर-उधर से कोई खास फर्क नहीं पड़ता क्योंकि एवरेस्ट पर कोई रिक्शा या टैक्सी से तो जाता नहीं है कि किराया बढ़ जाएगा। यूं भी लगभग अपने सारे देश में ऑटो रिक्शा या टैक्सियों के मीटर भरोसेमंद नहीं होते और वे 8000 मीटर को 14,000 या 15,000 या 16,000 मीटर कुछ भी बना सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं हो सकता कि अमेरिकियों ने नापा तो एवरेस्ट बढ़ गया और चीनियों ने नापा तो सिकुड़ गया। चीन अपनी मुद्रा युवान की कीमत तो जबर्दस्ती कम करके रखता है ताकि उसे निर्यात में फायदा हो, लेकिन एवरेस्ट को घटाना उसके बस की बात नहीं है। इस बात का एक ही मतलब है कि अभी हमारी नापजोख इतनी सही नहीं हुई है कि हम एवरेस्ट की ऊंचाई ठीक-ठीक नाप लें। एवरेस्ट की ऊंचाई का विवाद सुलझाने के लिए चीन और नेपाल में बातचीत भी हुई और आखिरकार बीच का रास्ता निकाला गया यानी दोनों ही ऊंचाइयों को मान्यता दी गई। यह कहा गया कि चीन ने जो ऊंचाई निकाली है वह बुनियादी पर्वत शिखर की ऊंचाई है और नेपाल जिस ऊंचाई को मानता है वह सर्दियों की ऊंचाई है जब शायद ज्यादा बर्फ जम जाती होगी। अगर ग्लोबल वार्मिग उतनी भयानक हुई जितनी कि पर्यावरणविद बता रहे हैं तो हमें एक और आंकड़ा प्राप्त हो सकता है और अगर हिमयुग आ गया जैसा कि पर्यावरणविदों के विरोधी बता रहे हैं तो एवरेस्ट की ऊंचाई और बढ़ जाएगी। जहां तक अमेरिकियों के आंकड़ों का सवाल है तो उनसे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि एवरेस्ट नेपाल और चीन के बीच में है और फिलहाल अमेरिकियों का वहां हस्तक्षेप करने का कोई इरादा नहीं है। विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है कि हम एक ओर मिलीमीटर के लाख या करोड़वें हिस्से तक का हिसाब करते हैं दूसरी ओर लाखों प्रकाश वर्षो दूर की आकाश गंगाओं की जानकारी पाने की कोशिश करते हैं। लेकिन यह ज्ञान की अनिश्चितता है कि अपने आसपास की कई चीजों की जानकारी हमें ठीक-ठीक नहीं होती। लेकिन यह अनिश्चितता ही ज्ञान की खोज को दिलचस्प बनाती है। हजारों वर्षो से इंसान उपलब्ध टेक्नॉलॉजी, अपने साहस और जिज्ञासा के सहारे पृथ्वी के अनजाने छोरों को खोजता आया है। एवरेस्ट पर चढ़ना भी एक ऐसा ही साहस है। अगर एवरेस्ट उस तरह जान लिया गया जैसे कोई आस पड़ोस का टीला हो तो उसका रोमांच क्या रहेगा। यह विवाद बताता है कि अब भी एवरेस्ट रहस्यमय है और इसीलिए उसमें हमारी दिलचस्पी भी बनी हुई है।

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