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आतंकवाद बनता ज्वलंत समस्या

आतंकवाद की जड़ें दिन-ब-दिन गहराती जा रही हैं। इसके अलावा नक्सलवाद भी नासूर बनता जा रहा है। आतंकवाद ने भारत ही नहीं पूरे विश्व को हिला कर रख दिया है। हाल ही में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए, जिसमें सात जवान उत्तराखंड के भी थे। ऐसी हिंसा जारी रही तो देश का अमन-चैन खतरे में पड़ जायेगा। देश में हो रही खौफनाक आतंकी घटनाओं का सबसे बड़ा कारण कठोर कानून का अभाव तथा कानून का लचीलापन होना है। यदि आतंकवाद के खिलाफ कठोर कानून अपनाया जाता तो ऐसी नौबत ही न आती। सरकार व कानून से अपील है कि इस मानवीय हिंसा को रोकें तथा शांति की स्थापना करने के लिये कदम बढ़ायें।
शूरवीर सिंह, डीएवी कॉलेज, देहरादून

अमीरी बनाम भुखमरी
भारत बड़ी तेजी से आर्थिक विकास की ओर अग्रसर हो रहा है। अब वह दिन दूर नहीं जब हम विश्व स्तर पर एक महाशक्ति के रूप में दिखाई देंगे। संसार के दस सबसे धनवान व्यक्तियों में तीन भारत के हैं, परन्तु इसका दूसरा पहलू भी है। भारत में सरकारी आंकड़ों के अनुसार, लगभग 40 करोड़ लोग गरीब हैं जिनकी आय मात्र 50 रुपये रोजाना है। साफ जाहिर है कि लगभग आधी आबादी कुपोषण का शिकार है। विश्व खाद्य कार्यक्रम के अनुसार, संसार में भुखमरी की शिकार कुल आबादी का एक-चौथाई भाग भारत में है, जबकि भारत गेहूं और चावल के उत्पादन में विश्व में दूसरे स्थान पर है। सरकारी गोदामों में करीब 5 करोड़ टन खाद्यान्न हमेशा जमा रहता है। इसके बावजूद ये आंकड़े चिंताजनक हैं। अमेरिका के बाद सबसे अधिक अरबपति भारत में हैं और दूसरी तरफ सबसे अधिक गरीबी और कुपोषण के शिकार भी इसी देश में हैं। सरकार को सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार लाकर कुपोषण की समस्या का समाधान करना चाहिए।
प्रेम राठौर, डोईवाला, देहरादून

नयी किरण
अप्रैल का महीना एक नयी सौगात लेकर आया है। सरकार द्वारा की जाने वाली महत्वपूर्ण घोषणाओं से आम नागरिक कितने लाभान्वित होने वाले हैं यह तो वक्त ही बतायेगा। फिलहाल शिक्षा के अधिकार जैसी योजनाएं लागू होने से कहीं न कहीं एक नई किरण जरूर दिखी है, जिससे हमारा देश निरक्षरों की जमात से बाहर निकलने की कोशिश करेगा। शिक्षा का स्तर वैसे भी हमारे देश में अभी भी इतना आगे नहीं है। दूसरी योजनाओं की अगर बात करें तो यूआईडी नम्बर से हमारे देश में मौजूद हर नागरिक को एक व्यापक पहचान मिलेगी। ऐसी योजनाओं से समाज को एक नयी दिशा मिल सकती है अगर इसे सही और व्यापक स्तर पर लागू किया जाये तो यह जरूर लोगों को लाभ पहुंचा सकती है। लेकिन वहीं जो बीच के लोग हैं वे अपनी स्वार्थपूर्ति में इस तरह लग जाते हैं कि उन्हें और कुछ नहीं बस अपना लाभ देखना होता है। बस यही कहने की जरूरत है कि योजनाएं तो लागू होती रहेंगी लेकिन इसे प्रभावों में लाने वालों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
नेहा सिंह, हरिद्वार

शादी को बेचने की तैयारी
ऐसा लगा जैसे मीडिया के पास सानिया-शोएब-आयशा के अलावा कोई मुद्दा नहीं रहा। सानिया जैसी सेलेब्रिटी हो या आम आदमी, उसकी जिन्दगी में कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जो बहुत निजी होती हैं। शादी भी ऐसा ही निजी मामला है, लेकिन मीडिया शादी जैसे निजी मामले को भी टीआरपी बटोरने का हथियार मानकर बेतुकी बातों पर ध्यान दे रहा है। हद तो जब हो गयी, जब इलेक्ट्रनिक मीडिया ने ऐसी क्लिपिंग दिखायी, जिसमें शोएब और सानिया एक कमरे में बातें कर रहे थे। लोगों के कमरों में में झांकने का हक मीडिया को कैसे है? सानिया अपनी शादी के दिन कौन-सा लहंगा पहनेगी? उसकी कीमत क्या होगी? उसे कौन फैशन डिजाइनर डिजाइन कर रहा है? शादी में कौन-कौन मेहमान रहेगा? शादी का वैन्यू और मेन्यू क्या होगा? कौन खानसामा खाना तैयार करेगा? सानिया और शोएब अपना हनीमून कहां मनाने जाएंगे? इन सब सवालों पर मीडिया अब 15 अप्रैल तक माथापच्ची करेगा। सानिया मिर्जा हो या कोई और सेलेब्रिटी, बात उसके प्रोफेशन की होनी चाहिए, शादी जैसे निजी मामले की नहीं।
सलीम अख्तर सिद्दीकी, हरिद्वार

हिंदी को रानी का दर्जा मिले
दिल्ली हाई कोर्ट का हिंदी में बहस प्रशंसनीय कदम है। इस कदम से हमारी हिन्दी की उपयोगिता और सम्मान में बढ़ोतरी होगी। गांधी जी कहा करते थे ‘हमारे देश में अंग्रेजी दासी की तरह रह सकती है रानी की तरह नहीं’। मगर आज अंग्रेजी सबके घरों में रानी की तरह प्रविष्ट कर पालथी मार कर बैठ गई है और अपने नौकरों के द्वारा हिन्दी से दासी की तरह व्यवहार करा रही है।
रविशंकर उपाध्याय, विकास नगर

नक्सलवाद का सच
नक्सलवाद अब गरीबों के हक की लड़ाई नहीं रहा। अब यह एक व्यवसाय बन चुका है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार तो उनके इस व्यवसाय का टर्नओवर 3000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का है। अगर जल्द ही कोई कारगर उपाय तलाशा नहीं गया तो अंजाम और भयानक हो सकता है।
मोहम्मद मोदस्सिर, देहरादून

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