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आईटीईआर

विश्व में ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। पूरा विश्व ऊर्जा की कमी से लंबे समय से जूझ रहा है। इस समस्या से निजात पाने के लिए भारत सहित विश्व के कई राष्ट्र मिलकर आईटीईआर नामक संलयन नाभिकीय प्रक्रिया पर आधारित ऐसा विशाल रिएक्टर बना रहे हैं, जो महज थोड़े से ईंधन की सहायता से ही अपार ऊर्जा उत्पन्न कर सकेंगे। ऐसा माना जा रहा है कि इससे काफी हद तक ऊर्जा की समस्याएं हल कर ली जाएगी। आईटीईआर का पूरा नाम है, इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरीमेंटल रिएक्टर।
इतिहास : आईटीईआर का गठन 1985 में यूरोपियन यूनियन, यूएसए, सोवियत यूनियन और जापान के सहयोग से शुरू हुआ था। सोवियत यूनियन के विघटन के बाद रूस इस परियोजना का भागीदार बना। वहीं 1999 में यूएस इस अभियान से हट गया है, लेकिन 2003 में यूएस ने फिर इस अभियान में शामिल होने की घोषणा की। भारत आधिकारिक रूप से इस मिशन का हिस्सा छह दिसंबर, 2005 को बना। बताया जा रहा है, आईटीईआर के निर्माण में लगभग दस वर्ष लगेंगे। वहीं इसमें छह मिलियन डालर की अमेरिकी राशि खर्च होगी। 28 जून, 2005 को यह घोषणा की गई कि इसका निर्माण फ्रांस में होगा। तो 21 नवंबर, 2006 को सात देशों ने इस परियोजना में फंड देने की घोषणा की। इसी दिन रिएक्टर
को बनाने के लिए एग्रीमेंट पर दस्तखत किए गए।  
कौन हैं भागीदार: परियोजना के भागीदार यूरोपीय संघ, जापान, चीन, रूस, द.कोरिया और यूएसए हैं। कनाडा पहले इसमें शामिल था, लेकिन 2003 में अपना हाथ खींच लिया था।
प्रक्रिया: ऊर्जा निर्माण के लिए नाभिकीय संलयन की इस प्रक्रिया में दो हल्के नाभिक जुड़कर बड़े नाभिक का निर्माण करेंगे जिससे अपार ऊर्जा मुक्त होगी और इसका रूपान्तरण करके विद्युत ऊर्जा में इसका उपयोग किया जा सकेगा।

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  • Web Title:आईटीईआर