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एलएन मिश्र इंस्टीटय़ूट की मान्यता पर ग्रहण !

ललित नारायण मिश्र आर्थिक विकास एवं सामाजिक परिवर्तन संस्थान की मान्यता पर ग्रहण लगने वाला है। क्योंकि इस संस्थान के पास चार माह से निदेशक नहीं है। फिलहाल संस्थान के रजिस्ट्रार (बिप्रसे) दीपक कुमार को ही निदेशक वित्तीय अधिकार देकर काम चलाया जा रहा।

मजबूरी में ये ही परीक्षा और नामांकन कार्य का भी संचालन कर रहे हैं। निदेशक नहीं होने की वजह से इस संस्थान पर ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीआई) की तलवार लटक सकती है क्योंकि इस माह में किसी भी दिन काउंसिल की टीम संस्थान का निरीक्षण करने आ सकती है।

उधर छात्रों की मानें तो निदेशक नहीं होने से कैम्पस में शैक्षणिक अराजकता का माहौल है। शोधकार्य प्रभावित है। सेमिनार नहीं हो रहे। छात्र अपना मार्क्स नहीं निकाल पाते। प्लेसमेंट बंद है। निदेशक बहाल करने की गुहार यहां के पूर्ववर्ती छात्रों धर्मेन्द्र कुमार सिंह, संजय कुमार झा, जयंत सिंह, शंकर प्रसाद और सुदीप सिन्हा ने भी सरकार से लगाई।

एमबीए फोर्थ सेमेस्टर के 160 छात्र भी एचआरडी के सचिव और प्रधान सचिव से मिलने गए पर नतीजा नहीं निकल सका। हालांकि निदेशक बहाली को लेकर फाइल एचआरडी से लेकर मुख्यमंत्री तक दौड़ चुकी है। चीफ सेक्रेट्री और सीएम ने तत्कालिक व्यवस्था के तौर पर संस्थान के वरीय शिक्षक को निदेशक का प्रभार देने का आदेश पहली फरवरी को ही दिया था पर अभी तक इस पर अमल नहीं हुआ है।

राज्य सरकार ने 2 जनवरी 2010 को तीन साल का कार्यकाल पूरा कर चुके केएएच सुब्रrाण्यम की जगह दिल्ली के एनईएम के प्रोफेसर अजीत कुमार को निदेशक बहाल किया। पर वे यूजीसी वेतनमान की जगह डेढ़ लाख से कम के पे पैकेज पर आने को तैयार नहीं हुए।

इधर 16 जनवरी को सुब्रमण्यम ने पदभार छोड़ दिया। तब सरकार ने नए निदेशक के आने तक उनसे पद पर बने रहने का आग्रह करने या फिर संस्थान के किसी वरीय प्रोफेसर को प्रभार में रखने का आदेश दिया। पर सुब्रमण्यम बिहार छोड़ चुके थे और संस्थान के शिक्षक की आज तक अधिसूचना जारी नहीं हुई।

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