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सरकार को डाक्टरों ने चेताया

डाक्टरों ने सरकार को चेताया है कि वह विरोधाभासी निर्णय कर राज्य स्वास्थ्य सेवा में डाक्टरों की उपलब्धता और उनसे समर्पित भाव से काम कराने में असफल हो जाएगी। केन्द्रीय वेतनमान देने में राज्य सरकार जो भेदभावपूर्ण निर्णय कर रही है वह डाक्टर नहीं होने देंगे। एक तरफ राज्य के प्रशासनिक और पुलिस सेवा को केन्द्रीय वेतनमान से ज्यादा वेतनमान देने का निर्णय किया गया है। वहीं डाक्टरों को केन्द्रीय वेतनमान से कम वेतनमान देने की घोषणा की गई है।

बिहार राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) ने अपनी इस पीड़ा से केन्द्रीय वेतनमान देने के लिए गठित एस. विजयराघवन की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति को अवगत करा दिया है। भासा के सचिव दिनेश्वर सिंह ने कहा है कि छठे वेतनमान पूनरीक्षण के आलोक में राज्य सरकार द्वारा गठित वेतन समिति ने स्वास्थ्य सेवा के लिए त्रुटिपूर्ण अनुशंसाएं की हैं। बिहार प्रशासनिक सेवा और बिहार पुलिस सेवा के समकक्ष केन्द्रीय अधिकारियों को पीबी-2 में ग्रेड पे 4800 का वेतनमान मिलता है। जबकि राज्य में उन्हें पीबी-2 ग्रेड पे 5400 का वेतनमान तय हुआ है।

वहीं राज्य के डाक्टरों समकक्ष केन्द्र के डाक्टरों को पीबी-3 ग्रेड पे 5400 का वेतनमान मिलता है। जबकि यहां डाक्टरों को पीबी-2 ग्रेड पे 5400 का वेतनमान तय हुआ है। यही नहीं उच्चत्तर पदों पर प्रोमोशन के मामले में भी प्रशसनिक और पुलिस सेवा को वरीयता दी गई है। 851 संवर्ग बल वाले इस वर्ग के लिए 20000 वेतनमान वाले 43 पद और 22000 वेतनमान वाले 24 पद सृजित हैं। जबकि 7000 संवर्ग बल वाले डाक्टरों के लिए इन वेतनमानों पर मात्र 2 पद ही हैं। विशिष्ट भत्ते देने में भी भेदभाव किया गया है।

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