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गरीबी खत्म किये बगैर विकास बेमानी : नीतीश

मख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि गरीबी खत्म किये बगैर विकास का कोई मतलब नहीं है। गरीबी न सिर्फ ब्राम्हण समुदाय बल्कि पूरे समाज का मुद्दा है। गरीब तो हरेक जाति में हैं। इसकी कोई जाति-बिरादरी नहीं होती। इसलिए गरीबी और अशिक्षा को जड़ से खत्म करने की जरूरत है। इसलिए 0-13 अंक पर गरीबी निर्धारण का फार्मूला बदलना चाहिए।

मुख्यमंत्री रविवार को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में सामाजिक एकजुटता महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। आयोजन ब्राम्हण समाज राजनैतिक चेतना समिति का था। ‘विजयी भव:’ के आशीर्वाद के साथ तिलक लगाकर मुख्यमंत्री का स्वागत करने के बाद आयोजकों ने विधानसभा के टिकटों पर दावेदारी पेश की। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि उनके रहते ब्राम्हण उपेक्षित नहीं होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम बोलते नहीं, बस काम करते रहते हैं। बोलने की आदत हमारे बड़े भाई को है। वह सुबह से शाम तक बोलते ही रहते हैं। पहले यहां राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए सिर्फ तनाव की खेती होती थी। अब बिहार का माहौल बदल गया है। कुछ लोग इन दिनों समाज में फिर से तनाव फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन हमारे कदम विकास की राह पर बढ़ चले हैं। यह सफर थमेगा नहीं।

ब्राम्हणों की अनदेखी के आरोप पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नया बिहार बनाने को लिए सबको हाथ मिलाकर चलने की आवश्यकता है। जब बिहार विकसित होगा और यहां समृद्धि आयेगी तो उसका असर चारों तरफ दिखेगा। बिहार के नवनिर्माण में आपका (ब्राम्हण) का भी योगदान होगा। इसलिए जब विकास का फल प्राप्त करने की बारी होगी तो उसमें भी आपका हिस्सा होगा।

ब्राम्हण भी हमारे साथ बिहार के विकास में सहभागी होंगे। हम ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे आपको नाराजगी हो। हमारी सरकार ने ही चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी स्थापित की।

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