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नक्सलियों ने अस्पताल, स्कूल व सामुदायिक भवन उड़ाए

नक्सलियों ने इस बार अधौरा के सारोदाग को निशाना बनाया है। शनिवार की रात उनके निशाने पर गांव का मिडिल स्कूल, सामुदायिक व दो अस्पताल भवन रहा। रात्रि में करीब 12 बजे 150 की संख्या में पहुंचे वर्दीधारी माओवादियों ने टोली बनाकर गांव को चारो तरफ से घेर लिया और सामुदायिक व अस्पताल भवन को  लैंड माइन विस्फोट कर उड़ा दिया। जबकि स्कूल भवन में इतनी दरारें पड़ गईं कि उसमें जाने में भी डर लग रहा है। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि घटना के घंटों बाद भी पुलिस सारोदाग नहीं पहुंच सकी। जबकि घटना स्थल से 20 किमी. पीछे अधौरा थाना व सीआरपीएफ का कैंप है।

जहां घटना हुई है वह स्थल जिला मुख्यालय भभुआ से 85 किमी. दक्षिण एवं उत्तर प्रदेश व झारखंड से दस किमी. की दूरी पर है। नक्सली रोहतास की ओर से आए थे और घटना को अंजाम देकर आथन के रास्ते रोहतास की ओर चले गए। बम इतना शक्तिशाली था कि भवन के दरवाजे व खिड़कियां दो सौ फुट दूर गिरी पड़ी थीं। नक्सली हरे पेड़ को काटकर लोहरा के पास सड़क पर गिरा दिए थे। समझा जाता है कि उक्त स्थल के आसपास नक्सली लैंड माइन बिछाए हुए थे और पुलिस की गाड़ियों को देखते ही बम विस्फोट कर देते।

उधर औरंगाबाद जिले के देव थाना क्षेत्र के यदुपुर गांव में स्थिति मध्य विद्यालय के भवन को भी नक्सलियों ने डायनामाइट से विस्फोट कर ध्वस्त कर दिया। लगभग 40-50 सशस्त्र नक्सलियों का दस्ता वहां पहुंचा और चार कमरे वाले स्कूल भवन में डायनामाइट लगा कर उसमें विस्फोट कर दिया। इस इलाके में नक्सलियों के खिलाफ कांबिंग ऑपरेशन चल रहा था। ऑपरेशन के दौरान उस स्कूल भवन में सीआरपीएफ की टुकड़ी को ठहराया गया था। पुलिस फोर्स के इस स्कूल में ठहरने को लेकर ही नक्सलियों ने इस स्कूल भवन को अपना निशाना बनाया है।

सारोदाग के ग्रामीणों ने बताया कि पांच माह पहले नक्सली गांव में आए थे। एक माह पहले भी उन्हें गांव के बगल से जाते हुए देखा गया था। सारोदाग पंचायत के मुखिया राजाराम सिंह ने कहा कि नक्सली हमलोगों की बात नहीं सुनते हैं। 

नक्सलियों ने घटना स्थल पर पोस्टर चस्पाकर पुलिस जवानों को जन सेना में शामिल होने का आह्वान करते हुए स्कूल भवन उड़ाए जाने के लिए छात्रों से माफी मांगी है तथा भवन को ध्वस्त करना अपनी मजबूरी बतायी है। इन माओवादियों ने 28 मार्च की रात दुग्धा में दो स्कूल भवनों को  भी उड़ाया था। लेकिन गनिमत कि वे अभी लोगों को निशाना नहीं बना रहे हैं। लेकिन लोग यह आशंका जता रहे हैं कि उनका क्या भरोसा किसी को भी पुलिस का मुखबिर बनाकर शूली पर चढ़ा सकते हैं।

बमों के धमाकों से थर्राये सारोदाग गांव के लोगों के चेहरे से खुशी गायब हो गई और उनके दिलों में दहशत कायम हो गया है। माओवादियों के खिलाफ हमेशा अपना मुंह बंद रखने वाले भोले भाले ग्रामीण अब उन्हें नफरत भरी नजरों से देख रहे हैं। हालांकि वे अभी भी नक्सलियों के खिलाफ मुंह खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाए हैं। फिर भी दबी जुबान से यह कहते सुना गया कि प्रशासन उनकी सुरक्षा की गारंटी करे तो नक्सलियों के कई राज सामने आ सकते हैं।

अवधेश तुरिया ने मिडिया वालों से पूछा कि जब बिहार में ग्रीनहंट ऑपरेशन शुरू नहीं हुआ है तो माओवादी यहां क्यों उत्पात मचा रहे हैं। इसके जवाब में गांव के ही एक युवक ने माओवादियों द्वारा साटे गए पोस्टर की ओर  इशारा किया। जिसमें यह लिखा हुआ था कि हमरा मकसद सरकारी भवनों में पुलिस कैंप को स्थापित नहीं करने देना है। एसपी पीके श्रीवास्तव ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि 50-60 की संख्या में आए उग्रवादियों ने बम विस्फोट कर तीन सरकारी भवनों को उड़ाया है। उग्रवादियों की गिरफ्तारी के लिए उनके ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। 

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