DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

नालंदा की धरती उगलने लगी सोना, गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार

बढ़ते तापमान के कारण चौपट होती खेती जहां कृषि वैज्ञानिकों को चिंता में डूबो दी है, वहीं गेहूं की ‘स्वी ’ विधि (सिस्टम ऑफ व्हीट इंटेंसिफिकेशन) से धरती सोना उगलने लगी है। गेहूं की पैदावार में नालंदा ने पंजाब को भी पछाड़ दिया है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन तथा आत्मा के सहयोग से जिला कृषि विभाग ने सौ एकड़ में ‘स्वी ’ विधि द्वारा गेहूं की फसल लगायी थी। परबलपुर के धनावां, नूरसराय के दरूआरा, चंडी व चैनपुर में फसल की हुई कटनी से यह आंकड़ा मिला कि सामान्य विधि से ‘स्वी’ पद्धति में करीब दोगुना से भी अधिक उपज हुई।

कृषि वैज्ञानिक व खाद्य सुरक्षा मिशन के एडवाइजर कुमार किशोर नंदा ने बताया कि सामान्य विधि से 42 क्विंटल प्रति हेक्टेयर जबकि स्वी विधि से 85 क्विंटल गेहूं का उत्पादन हुआ। सामान्य विधि में एक थल्ले में 34 कल्हे (शाखाएं) जबकि स्वी विधि में 54 कल्हे निकले। वहीं एक बाली में क्रमश: 46 व 86 दाने हुए। जबकि सामान्य विधि से स्वी पद्धति में एक चौथाई बीज का ही उपयोग किया गया।

चैनपुर के किसान सत्येन्द्र नारायण सिंह, चंडी के जयनारायण, धनावां के अनंत कुमार, उदय नंदन प्रसाद, श्रीकिशोर प्रसाद, देवेन्द्र कुमार, सुरेश प्रसाद, प्रमोद कुमार, दरूआरा के संजय कुमार, संजय पासवान, आलमगीर बताते हैं कि स्वी विधि किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। परंतु दो-दो बीज की चुटकी से बुआई करना एक कठिन कार्य है। अधिकारी बताते हैं नालंदा के किसानों को बीज देर से उपलब्ध होने के कारण बुआई देर से हुई थी। ऐसा न होता तो उपज 90 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के आंकड़े को भी पार कर जाती।

‘इस विधि में गेहूं के पौधे की जड़ गहराई तक जाती है। वहीं बाली काफी लंबी होती है। स्वी विधि से उपज सामान्य की उपेक्षा दोगुनी होती है जो पंजाब की अपेक्षा काफी अधिक है। बीज गिराने में हो रही दिक्कत अगले वर्ष से समाप्त हो जाएगी। आईआईटी, खड़गरपुर के छात्रों के द्वारा मशीन विकसित कर ली गयी है।

मशीन का ट्रायल चल रहा है। मशीन के आ जाने के बाद किसान सामान्य विधि से गेहूं लगाना भूल ही जाएंगे। इस विधि का प्रचलन हो जाने के बाद खाद्यान्न की कमी नहीं रहेगी।’ सुदामा महतो, डीएओ (नालंदा)

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:नालंदा की धरती उगलने लगी सोना