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मौद्रिक नीति में और बढ़ सकती हैं नीतिगत दरें: बैंकर

मौद्रिक नीति में और बढ़ सकती हैं नीतिगत दरें: बैंकर

तेजी से बढ़ती मुद्रास्फीति और आर्थिक वृद्धि में स्थिरता के संकेतों के बीच रिजर्व बैंक की आगामी 20 अप्रैल को आने वाली सालाना मौद्रिक नीति में रेपो, रिवर्स रेपो सहित प्रमुख नीतिगत दरों में चौथाई से लेकर आधा फीसदी तक वृद्धि हो सकती है।

शीर्ष बैंकरों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति से निपटने के लिये नीतिगत दरों को और कड़ा कर सकता है। इससे पहले, रिजर्व बैंक ने जनवरी माह में नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में जहां 0.75 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है, वहीं मार्च महीने में रेपो और रिवर्स रेपो में प्रत्येक में 0.25 फीसदी की वृद्धि की है।

बैंकों का सीआरआर इस समय 5.75 प्रतिशत पर है जबकि रेपो रेटर 5.00 और रिवर्स रेपो रेट 3.50 प्रतिशत पर है। सीआरआर के रूप में उतनी राशि रिजर्व बैंक के पास आरक्षित रखनी पडती है जबकि रेपो और रिवर्स रेपो दर पर बैंक अपनी अल्पकालिक जरूरतों के लिये रिजर्व बैंक से धन लेते हैं अथवा उसके पास रखते हैं।

ओरिएंटल बैंक आफ कामर्स के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक टी वाई प्रभु ने कहा कि रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिये प्रमुख दरों में 0.25 फीसदी से लेकर 0.5 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर सकता है।

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