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शिक्षा का अधिकार: केंद्र से अधिकांश पैसे चाहते हैं राज्य

शिक्षा का अधिकार: केंद्र से अधिकांश पैसे चाहते हैं राज्य

मनमोहन सिंह सरकार शिक्षा के अधिकार कानून का ऐतिहासिक फैसला लेने के बाद इसको लागू करने के लिए कई राज्यों से अरबों रुपये की मांग का सामना कर रही है। कानून लागू करने में शिक्षकों की कमी और मूलभूत सुविधाएं अन्य चुनौतियां बनी हुई हैं।

करीब सभी राज्य सरकारें चाहती हैं कि केंद्र सरकार प्रस्तावित 55 फीसदी राशि की साझीदारी को बढ़ाकर 75 से 90 फीसदी कर दे। बिहार और अरुणाचल प्रदेश चाहते हैं कि केंद्र सरकार शत़-प्रतिशत कोष उपलब्ध कराए।

बहरहाल सभी राज्य केंद्र सरकार के साथ इस बात पर सहमत हैं कि छह वर्ष से 14 वर्ष के बीच के सभी बच्चों को नि:शुल्क और आवश्यक शिक्षा मुहैया कराई जाए। राज्यों का कहना है कि नयी पहल अद्वितीय, स्वागतयोग्य, क्रांतिकारी और बहुप्रतीक्षित थी। नया कानून इस वर्ष एक अप्रैल से लागू हुआ।

लेकिन शिक्षा प्रणाली को ऐतिहासिक बनाने के लिए अगले पांच सालों में 1.71 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा जिससे राज्य असहज अनुभव कर रहे हैं।

बिहार जैसे राज्य चाहते हैं कि केंद्र सरकार शत़ प्रतिशत धन मुहैया कराए। उत्तर प्रदेश जैसे घनी आबादी वाले राज्य 90 फीसदी राशि चाहते हैं जबकि कुछ राज्य चाहते हैं कि केंद्र सरकार 75 फीसदी का योगदान दे। केंद्र सरकार ने वर्तमान में अपनी ओर से 55 फीसदी और राज्यों की ओर से 45 फीसदी योगदान का प्रस्ताव तैयार किया है।

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