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लखनऊ में मुन्ना भाई ने खोजीं जड़ें

संजय दत्त ने लखनऊ संसदीय क्षेत्र में सियासत ‘ककहरा’ शुरू कर दिया!..बुधवार की सुबह जॉपलिंग रोड के ‘क्लोसल अपार्टमेन्ट’ पहुँचे। इस अपार्टमेन्ट में रह रहे पारिवारिक मित्र कैप्टन सिकन्दर रिÊावी के घर उनकी पत्नी मान्यता की मुँह दिखाई की रस्म हुई! मगर तयशुदा समय पर गन्ने वाली गली नहीं पहुँच सके। जहाँ लोग सुबह आठ बजे से ही पलक-पाँवड़े बिछाये बैठे थे। छोटी सी गली। हाारों लोग। पुलिस प्रशासन, पार्टी, संजू सब के लिए ऊहापोह की स्थिति। जाना तो है मगर जाएँ तो कैसे? इलाके की हर सड॥क संजय दत्त के प्रसंशकों से अवरुद्ध। ऐसे में संजयदत्त दूसर कार्यक्रमों को निपटाते रहे। उधर गली में अपेक्षाएँ मुहब्बात की सीमाएँ लांघकर आक्रोश के करीब जा पहुँची। ..आखिर शाम तकरीबन साढ़े सात बजे संजय दत्त गन्ने वाली गली के मकान नम्बर-102 पहुँचे। तब लोगों में सुबह फैली निराशा काफूर हुई। संजय जिन्दाबाद!! ‘संजय तुम संघर्ष करो, हम तुम्हार साथ हैं’, जसे सियासी नार लगे।.. तकरीबन आधे घण्टे तक इस गली में रुककर हल्की धक्का-मुक्की के बीच संजय दत्त मुस्कराते हुए वापस लौट गए। लखनऊ संसदीय क्षेत्र से समाजवादी पार्टी का प्रत्याशी घोषित होने के बाद संजय दत्त दूसरी बार आए। पहली बार रोड-शो किया था। दूसर सफर में चुनावी अभियान का आगाा। कुर्ता-पायजामा और खादी की सदरी..इसी लिबास में बुधवार की सुबह कैप्टन सिकंदर रिावी के घर पहुँचे। यहाँ अवधी परम्परा से उनकी पत्नी मान्यता का स्वागत किया गया। मुँह दिखाई की रस्म हुई। फिर रिावी परिवार ने तस्वीरों के रूप में संजो कर रखी गई सुनीलदत्त की बचपन की तस्वीरं उनके बेटे संजय दत्त के सामने रखीं। जिन्हें संजय काफी देर तक देखते रहे। यहाँ से निकल कर सुबह नौ बजे संजय दत्त उनकी पत्नी मान्यता को गन्ने वाली गली के उस मकान में जाना था, जहाँ उनके पिता सुनील दत्त काफी समय तक रहे। वह यहाँ के लिए निकले, मगर तयशुदा समय पर पहुँच नहीं पाए। क्योंकि उनके चाहने वालों की भीड़ से अमीनाबाद के आसपास का इलाका जाम हो गया था। नाकाफी थे सुरक्षा इंतजाम..ड्ढr प्रशासन को संजय दत्त का प्रोग्राम मालूम था।बावजूद इसक गन्ने वाली गली में सुरक्षा के इंतजाम नहीं किये गए। हाारों लोगों का मजमा था, जिसे नियंत्रित करने का जिम्मा चन्द पुलिस वालों को हवाले था। घर को देखने संजय को आना था वहांँ भी सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। अमीनाबाद पहुंचने के बाद भी उनको सुरक्षा में लेने के बजाय पुलिस दूर खड़ी तमाशा देखती रही। इससे घबरा कर संजय सुबह बिना घर देखे ही अमीनाबाद से वापस लौट गए।

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