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नसबंदी के बाद भी बच्चा, परिवार परेशान

परिवार नियोजन के उपाय अपनाने वाले दंपती के दिमाग में हमेशा यही बात होती है कि अब उन्हें किसी अनचाहे प्राणी के आगमन का सामना नहीं करना पड़ेगा मगर यह बात हमेशा सही साबित नहीं होती। कम से कम उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर निवासी कंवरपाल के लिए तो बिल्कुल नहीं जिसे पत्नी की नसबंदी के बावजूद औलाद नसीब हुई है।

शामली ब्लाक के गांव रामगढ़ के निवासी कंवरपाल और उसकी पत्नी शकुंतला उर्फ सुखिया का छह बच्चों से भरापूरा परिवार है। आधे दर्जन बच्चों होने के बाद कंवरपाल को सुध आई और उसने यह सोच कर शकुंतला की नसबंदी का आपरेशन करवा लिया कि परिवार सीमित रखना चाहिए। आठ साल पहले नसबंदी करवा कर वह निश्चिंत हो गया लेकिन प्रकृति को शायद कुछ और ही मंजूर था।

कंवरपाल को उम्मीद थी कि अब उसे बच्चा नहीं होगा लेकिन विज्ञान की तक नीक नसबंदी पर भरोसा करना उसे तब महंगा पड़ा जब कुदरत ने उसकी झोली में एक और मामलों में एक दो ऐसे मामलों से इंकार नहीं किया जा सकता। इक्का दुका मामले में ऐसा हो सकता है कि नसबंदी करवाने के बावजूद मां की गोद एक बार फिर भर जाए। ऐसे मामलों में सरकार पीडित परिवार को मदद उपलब्ध कराती है। अगर महिला अपनी नसबंदी के कागजात सीएमओ कार्यालय में जमा कराए तो उसे करीब 25 हजार रूपए की सहायता राशि मिल सकती है।

 

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