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बढ़ती गर्मी बढ़ा रही है किडनी में पथरी की समस्या

बढ़ती गर्मी बढ़ा रही है किडनी में पथरी की समस्या

विशेषज्ञों ने ग्लोबल वार्मिंग की वजह से धरती के तापमान में तेजी से हो रही बढ़ोतरी के कारण किडनी में पथरी की समस्या बढ़ने की आशंका जताई है। दरअसल किडनी में पथरी का एक मुख्य कारण डिहाइड्रेशन है।

नए वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर चिकित्सा विशेषज्ञों ने आशंका व्यक्त की है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण किडनी में पथरी की समस्या में आम तौर पर तेजी से वृद्धि होगी। कुछ खास क्षेत्रों में यह समस्या बहुत तेजी से बढ़ेगी। इन क्षेत्रों को 'किडनी स्टोन बेल्ट' का नाम दिया गया है।

एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ एनके पांडे के अनुसार किडनी में पथरी का एक मुख्य कारण डिहाइड्रेशन है और ग्लोबल वार्मिंग से डिहाइड्रेशन बढ़ेगा, जिससे किडनी की पथरी की समस्या बढ़ सकती है।

कुछ वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि धरती के तापमान में हो रही वृद्धि के कारण सन 2050 तक 16 से 22 लाख अतिरिक्त लोगों में किडनी की पथरी की समस्या होगी। कुछ क्षेत्रों में किडनी की पथरी के मामलों में 30 प्रतिशत तक की वृद्धि होने की आशंका है।
 
एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एआईएमएस) के प्रमुख नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. जितेन्द्र कुमार के मुताबिक गर्मियों में किडनी में पथरी की समस्या में आम तौर पर बढ़ोतरी हो जाती है। पथरी की समस्या का संबंध पानी पीने की मात्रा से है और इसलिए इस समस्या से बचने के लिए खूब पानी पीना चाहिए।
 
एआईएमएस के निदेशक के अनुसार किडनी में पथरी की बीमारी या नेफ्रोलाइथिएसिस एक सामान्य बीमारी है। किडनी में पथरी ठोस क्रिस्टल होते हैं और मूत्र में घुलनशील लवण से बनते है। ये पर्यावरण और मेटाबोलिक समस्याओं के कारण बनते हैं। कम मात्रा में तरल पदार्थ के सेवन या डिहाइड्रेशन के कारण शरीर से अधिक मात्रा में तरल के निकलने के कारण पेशाब का बनना कम हो जाता है, जिससे पथरी का निर्माण करने वाले नमक का सांद्रण बढ़ जाता है। इस कारण पथरी बनने का खतरा भी बढ़ जाता है।
 
डॉ.जितेन्द्र कुमार ने कहा कि ज्यादा मात्रा में पानी पीने से किडनी में पथरी होने की आशंका घटती है। मूत्रांगों में बार-बार संक्रमण होने और अनेक आनुवांशिक कारणों से किडनी में पथरी होने की आशंका बढ़ती है जबकि अधिक मात्रा में पानी पीने से इन कारणों के बावजूद किडनी की पथरी होने की आशंका घटती है। किडनी में पथरी की समस्या हमारी तमाम कोशिशों के बाद भी हो जाती है। जो पथरी चार मिलीमीटर आकार से कम होती है वह पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाती है लेकिन छह मिलीमीटर से बडी पथरी पेशाब के जरिए बाहर नहीं निकल पाती है।
 
अक्सर यह देखा गया है कि कई लोग गर्मी के दिनों में शरीर से निकलने वाले पानी की क्षतिपूर्ति के लिए पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ नहीं लेते हैं। उनका सुझाव है कि कम से कम रोजाना तीन लीटर (आठ से दस ग्लास) से ज्यादा पानी पीना चाहिए और गर्मी के दिनों में दोगुना पानी पीना चाहिए। कई लोग पानी पीने के अंतराल में काफी अंतर रखते हैं जबकि समय-समय पर पानी पीते रहना चाहिए।
 
डॉ. के मुताबिक बर्फ से ठंडी बीयर एवं अन्य एल्कोहोलिक पेय पदार्थों से परहेज करना चाहिए क्योंकि इनके कारण शरीर से अधिक मात्रा में पानी निकलता है। आम धारणा यह है कि बीयर से फायदा होता है, लेकिन दरअसल बीयर से कोई फायदा नहीं होता।
 
पोषण एवं आहार विशेषज्ञ शिल्पा ठाकुर कहती है कि मांसाहारी आहार का सेवन कम करें या ऐसे आहार से बचें, क्योंकि पशु प्रोटीन से युक्त आहार से किडनी पथरी की समस्या बढ़ती है। अगर मांसाहारी आहार से परहेज नहीं कर सकते तो इसका कम सेवन करें और मांसाहारी आहार लेने पर ताजा हरी सब्जियों के सलाद अधिक मात्रा में खाएं। नमक का सेवन कम करें। ज्यादातर फास्ट फूड में अधिक मात्रा में नमक होता है।

उन्होंने बताया कि कुछ लोगों को मेटाबोलिक कारणों से पथरी बनने की आशंका रहती है। पथरी के रसायनिक घटकों के आघार पर यूरिक एसिड एवं ऑक्जीलेट की मात्रा पर नियंत्रण के लिए खान-पान में किस तरह का परहेज रखना चाहिए, इसके बारे में आहार विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए।

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