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घातक कबाड़ से प्रभावित आम आदमी मुआवजे का हकदार

राष्ट्रीय राजधानी में रेडियोधर्मी विकीरण से छह लोगों के प्रभावित होने पर विधि विशेषज्ञों ने कहा है कि आबादी के बीच हानिकारक कबाड़ कारोबार की अनुमति गैर कानूनी है और विकिरण की चपेट में आने वाले लोग सरकार और संबंधित व्यापारी से मुआवजा पाने के हकदार हैं।

कानून के प्रावधानों की जानकारी के अभाव में पश्चिम दिल्ली के मायापुरी इलाके में कबाड़ से फैले रेडियोधर्मी विकीरण की चपेट में आए लोगों के चंदा मांगकर इलाज कराने की खबरें सामने आ रही हैं।

उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता जगदीप धनखड़ ने कहा घातक कबाड़ से प्रभावित होने पर आम आदमी के संरक्षण के लिए लोक बीमा दायित्व कानून, 1991 बनाया गया है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति कलेक्टर के समझ मुआवजे का दावा कर सकता है।

उन्होंने कहा कि घातक कबाड़ और उसके विकीरण से प्रभावित या उस क्षेत्र में रहने वाला कोई भी व्यक्ति इस विषय पर केंद्र सरकार को 60 दिनों का नोटिस देकर अदालत में मामला दर्ज करा सकता है।

दिल्ली उच्च न्यायालय में अधिवक्ता ललित कुमार झा ने कहा, ऐसी कंपनी या संस्था में काम करने वाले लोगों के लिए बीमा का प्रावधान तो होता ही है लेकिन लोक बीमा दायित्व कानून, 1991 में घातक कबाड़ से प्रभावित आम लोगों को राहत प्रदान करने की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने कहा कि कानून की धारा 3 एवं उपधारा (1) और अधिनियम के उद्देश्य और कारण में दर्ज तथ्यों के अनुरूप कोई भी प्रभावित व्यक्ति मुआवजा प्राप्त कर सकता है। झा ने कहा कि कानून की धारा 6 के तहत कोई भी व्यक्ति कलेक्टर के समझ मुआवजे का आवेदन कर सकता है। इसमें यह भी कहा गया है कि कलेक्टर इस तरह के मामलों की जानकारी मिलने पर स्वयं इसकी पुष्टि कर सकता है और कारण का पता लगा सकता है।

उन्होंने कहा कलेक्टर को ऐसे मामलों की जानकारी मिलने पर मुआवजे के प्रावधानों की जानकारी खुद लोगों को बताने को कहा गया है क्योंकि आमतौर पर आम लोगों को इन बातों की जानकारी नहीं होती है।

दिल्ली उच्च न्यायालय के एक अन्य अधिवक्ता अमन सरीन ने कहा कि अधिनियम की धारा 3 (1) के साथ अनुच्छेद जुड़ा हुआ है जिसमें विभिन्न स्थितियों में प्रभावित लोगों के लिए मुआवजे की राशि का प्रावधान किया गया है।

घातक कबाड़ से सामान्य तौर पर घायल व्यक्ति चिकित्सा उपचार के लिए अधिकतम 12,500 रूपये की धनराशि प्राप्त कर सकता है। घातक दुर्घटना का शिकार होने की स्थिति में चिकित्सा उपचार राशि के अलावा 25,000 रूपये का मुआवजा भी प्राप्त कर सकता है।

दुर्घटना से प्रभावित कोई भी व्यक्ति अगर स्थायी या आंशिक विकलांगता का शिकार होता है तो चिकित्सा दल से प्राप्त विकलांगता प्रमाणपत्र के आधार पर मुआवजे की राशि तय की जायेगी। पूर्ण स्थायी विकलांगता की स्थिति में 25 हजार रूपये की राहत प्राप्त की जा सकती है। सरीन ने कहा कि अगर कोई कंपनी या व्यक्ति इस कानून का उल्लंघन करता है तो सरकार या सरकार की ओर से अधिकार प्राप्त संस्था इनके खिलाफ मामला दर्ज करा सकती है या उसे बंद करने को कह सकती है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य बी बी भटटाचार्य के अनुसार दिल्ली के मायापुरी इलाके में विकीरण बेहद शक्तिशाली स्रोत से निकला है, जिसके सम्पर्क में आने वाले एक दुकानदार समेत छह लोग गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। विशेषज्ञों ने इस पदार्थ की पहचान कोबाल्ट 60 के रूप में की है जो एक कठोर, चमकीले और भूरे रंग का धातु है। इसका इस्तेमाल रंग रोगन, आभूषणों और पेंटस आदि में भी होता रहा है। वैज्ञानिकों ने पोर्टेबल स्पेक्ट्रोमीटर का इस्तेमाल कर विकीरण के स्रोत की पहचान की।

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