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उपेक्षित रहा पशुधन एवं दुग्ध विकास क्षेत्र

कृषि के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है पशुधन एवं दुग्ध विकास। क्योंकि दोनों ही सीधे जनता से जुड़े क्षेत्र हैं। बिना दूध के व्यक्ति एक दिन भी नहीं रह सकता किन्तु केन्द्र एवं प्रदेश सरकार की ओर से जो मदद इस क्षेत्र को मिलनी चाहिए आजादी के 62 सालों बाद भी नहीं मिल पा रही है।

यह कहना था, उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अवधपाल सिंह यादव का उ.प्र. पशु चिकित्सा संघ के एक समारोह में।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के लगभग तीन सालों के कार्यकाल में 200 चिकित्सालयों का निर्माण कराया गया एवं 30 पशु सेवा केन्द्र खोले गए। इसके साथ ही जीर्ण, शीर्ण चिकित्सालयों का पुनरुद्धार कराया गया। उन्होंने कहा कि तमाम तकनीकी बाधाओं के बावजूद भी वे 414 चतुर्थ श्रेणी के पदों के सृजन के लिए प्रयासरत हैं।

यादव ने कहा कि प्रयास सदैव ग्रामोनमुखी एवं किसानोन्मुखी होने चाहिए। पशुपालन सम्पूर्ण जनमानस से जुड़ा क्षेत्र हैं। उन्होंने गौशालाओं के विकास और पशुक्रूरता को समाप्त करने एवं पशुसंवर्धन के लिए अधिकाधिक प्रयास करने पर बल दिया। सम्मान समारोह को पशुधन विभाग के सचिव डा. हरशरण दास ने पूर्व से चले आ रहे वेटेरेनरी मैनुअल में संशोधन पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि विभाग का मैनुअल तैयार किया जाए ताकि नियमों की जानकारी आसानी से हो सके। विभाग में जितने पद उपलब्ध हैं उसके दुगने पदों की आवश्यकता है। विभाग को सुदृढ़ बनाने के हर सम्भव प्रयास किए जा रहे हैं। सम्मान समारोह को निदेशक पशुपालन डा. रुद्रप्रताप द्वारा भी सम्बोधित किया गया।

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