DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मूल्यांकन व्यवस्था में है छेद

कॉपियों का बंडल सड़क पर मिलने की घटना ने इविवि की मूल्यांकन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कॉपियों के मूल्यांकन की स्नातक और परास्नातक स्तर पर दो व्यवस्था है। स्नातक की कॉपियों को जांचने के लिए इविवि में तीन केंद्र बनाए गए हैं, जहां परीक्षक कॉपियां जांचते हैं।

मूल्यांकन प्रभारी एवं भूगोल विभाग के अध्यक्ष प्रो. बीएन मिश्र ने बताया कि कुछ विषयों की कॉपियां इविवि और डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों को जांचने के लिए भी दी जाती हैं। बकौल प्रो. मिश्र वह इविवि के शिक्षकों के घर पर गार्ड के साथ अपने कर्मचारियों से कॉपियां भेजवाते हैं जबकि डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों के उपस्थिति होने पर उन्हें कॉपी दी जाती है।

रहा सवाल परास्नातक का तो इसकी कॉपियों के मूल्यांकन की व्यवस्था सीधे परीक्षा नियंत्रक दफ्तर से की जाती है। पीजी की कॉपियां कम होती हैं इसलिए केंद्रीय मूल्यांकन की व्यवस्था नहीं है। परीक्षा नियंत्रक दफ्तर के कॉपियों का बंडल संबंधित शिक्षक के विभाग में प्राप्त करवाया जाता है। इस घटना से स्पष्ट है कि व्यवस्था में कहीं न कहीं छेद जरूर है। शायद इसी का फायदा उठाकर लोग कॉपी जांचने वाले शिक्षकों का नाम भी जान जाते हैं, जिसे बेहद गोपनीय रखा जाता है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:मूल्यांकन व्यवस्था में है छेद