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हिमालय बचाने को हुए एकजुट

पहाड़ पर जल-जंगल-जमीन सहित अन्य जन मुद्दों पर अब अलग-अलग आंदोलन दिखाई नहीं देंगे। सत्ता पर कारगर दबाव बनाने के लिए आंदोलकर्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं व स्वयं सेवी संगठनों ने एक प्लेटफॉर्म पर काम करने का निर्णय लिया है। हिमालय को बचाने के लिए संयुक्त रूप से आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसके लिए कोर कमेटी भी गठित कर दी गई है।

हैस्को विज्ञान ग्राम शुक्लापुर में उत्तराखंड के रचनात्मक कार्यकर्ताओं की दो दिवसीय मित्र-मिलन गोष्ठी में आज अंतिम दिन यह फैसला लिया गया। पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा ने कहा कि चिपको और टिहरी बांध विरोध की लड़ाई जारी है। आज एक व्यापक हिमालय नीति की जरूरत है जो कि लोगों के विकास में भागीदार बने।

गांधी प्रतिष्ठान की अध्यक्ष राधा भट्ट ने हिमालय की प्रकृति और वहां लोगों के संरक्षण की जरूरत बताई। सुरेश भाई व एनडी जुयाल का कहना था कि पर्यावरण संरक्षण के लिए नदियों पर बड़े बांध बनाने पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। अमेरिका में इसकी शुरुआत हो चुकी है।

हैस्को के संरक्षक पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी ने बताया कि गोष्ठी में हिमालय को बचाने के लिए विभिन्न विचार सामने आए। इनके आधार पर 13 संस्तुतियां तैयार की गई हैं, जिन्हें कार्रवाई के लिए केंद्र व हिमालयी राज्यों की सरकारों को भेजा जाएगा। कोर कमेटी में डॉ. अनिल जोशी, राधा भट्ट, सदन मिश्र, विजय जड़धारी व देवेंद्र बहुगुणा शामिल हैं।

कमेटी की 2 मई की बैठक में संयुक्त आंदोलन का नाम तय किया जाएगा। गोष्ठी में अंतिम दिन विजय जड़धारी, धूम सिंह नेगी, सुरेश भाई, विधायक किशोर उपाध्याय और गोविंद कुंजवाल, वाचस्पति मैठानी, सुमित्र धूलिया, गीता गैरोला, हर्ष डोभाल, देवेंद्र बहुगुणा आदि ने विचार व्यक्त किए।

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