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अब मनमोहन की हरी झंडी का इंतजार

औद्योगिक पैकेज पर वित्त मंत्रलय ने अपनी आपत्तियों में सुधार करते हुए फाइल प्रधानमंत्री की टेबल पर सरका
दी है। कांग्रेसी सूत्रों को अब 15 अप्रैल से पहले अवधि बढ़ाए जाने का पूरा भरोसा है। उधर, पंजाब व हरियाणा सरकार व उनके अधिकारी औद्योगिक पैकेज को लेकर कड़ा रुख अपनाए हुए हैं। पूरे एक पखवाड़े तक दिल्ली में डटे रहने के बाद नेता प्रतिपक्ष डा. हरक सिंह रावत भी शनिवार की सांय राजधानी लौट आए।

उधर, केन्द्र  सरकार की खामोशी को देखते हुए भाजपा भी बैसाखी के स्नान के बाद नए सिरे से मोर्चा खोलने की तैयारी में है। कांग्रेसी सूत्रों के मुताबिक दस जनपथ व प्रधानमंत्री कार्यालय के इस मामले में विशेष रुचि लेने के बाद वित्त मंत्रलय ने औद्योगिक पैकेज की फाइल को अपने स्तर से ठीकठाक कर प्रधानमंत्री कार्यालय भेज दी है। प्रधानमंत्री कार्यालय से स्वीकृति मिलने के बाद पैकेज की अवधि की घोषणा कर दी जाएगी।

31 मार्च को पैकेज की अवधि खत्म होने के बाद अधिकतर कांग्रेसी नेता दिल्ली में ही  जमे रहे। डा. रावत ने बताया कि इस दौरान पार्टी सांसदों ने अपने स्तर से केन्द्रीय नेताओं से पैकेज के बाबत अपने तर्क रखे। मोतीलाल वोरा ने भी उत्तराखंड से जुड़े इस मुद्दे पर केन्द्रीय नेताओं से वार्ता की। इस बीच, पंजाब व हरियाणा के कद्दावर राजनीतिज्ञ व अधिकारी लगातार उत्तराखंड व हिमाचल के पैकेज के विरोध में लाबिंग में जुटे हैं।

नेता प्रतिपक्ष डा. रावत ने बताया कि इन दोनों राज्यों के अधिकारी वित्त व उद्योग मंत्रलय में भी पैकेज के विरोध में तर्क दे रहे हैं।  दिल्ली से लौटे डा. रावत ने बताया कि सोनिया गांधी व प्रधानमंत्री ने पैकेज की अवधि बढ़ाने का ठोस आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा 15 अप्रैल से पहले प्रदेश हित में निर्णय ले लिया जाएगा। इधर, प्रदेश भाजपा कुंभ स्नान के बाद एक बार फिर दिल्ली पर दबाव बढ़ाने की रणनीति में जुटी है।

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