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पहियों के जरिये गांव-गांव पहुंचेगा ‘ज्ञान’

उत्तराखंड की सीमाओं में बसे अंतिम गांवों तक शिक्षा की अलख जगाने के लिए उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने कमर कस ली है। बात चाहे पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी या गुंजी गांव की हो, बागेश्वर के खाती गांव या फिर गंगोत्री के निकट बसे हर्षिल, उत्तरकाशी के अंगोठा और गंगी गांव की।

हर गांव में शिक्षा पाने से छूट रहे लोगों को शिक्षित करने के लिये मुक्त विवि ने नयी दिशा में प्रयास शुरू किये हैं। लोगों को सोचकर हैरानी होगी कि जिन गांवों में दूर-दूर तक स्कूल नहीं दिखते वहां व्यावसायिक शिक्षा के पाठय़क्रम कैसे संचालित होंगे। मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विनय पाठक और रजिस्ट्रार डॉ. बीआर पंत बताते हैं कि सीमाओं के अंतिम गांवों में शिक्षा का प्रसार करने के लिए मोबाइल वैन चलाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि पहले प्रयास स्टडी सेंटरों की संख्या बढ़ाने की तरफ किया जा रहा है।

प्रदेश में तकरीबन 20 हजार बच्चों को जोड़ने का लक्ष्य लेकर नये शिक्षा सत्र शुरू करने की तैयारियां पूरी कर ली गई है। प्रदेश में हल्द्वानी, द्वाराहाट, पिथौरागढ़, बागेश्वर, डीडीहाट, उत्तरकाशी, पौढ़ी, गोपेश्वर, देहरादून और रुड़की में दस स्टडी सेंटर खोले जा चुके हैं जबकि तकरीबन 100 नये स्टडी सेंटर खोले जाने की योजना है।

इसके बाद भी कम आबादी और दूरदराज के गांवों में विभिन्न पाठय़क्रमों का लाभ अभ्यर्थियों को देने के लिये मोबाइल वैन सर्विस शुरू की जायेगी। वैन के माध्यम से न सिर्फ पढ़ने वालों तक पाठय़ सामग्री पहुंचायी जायेगी, बल्कि अनुभवी टीचरों के माध्यम से आवश्यक परामर्श भी दिया जायेगा।

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