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आर्थिक दंड से नहीं बच सकते अपीलीय अफसर

समय पर सूचना उपलब्ध न कराने व सूचना की पहुंच में बाधा बनने पर विभागीय अपीलीय अधिकारी आर्थिक दंड से नहीं बच सकते हैं। लोक सूचना अधिकारी की तरह उन्हें भी जुर्माना देना होगा। एक मामले की सुनवाई के दौरान सूचना आयोग ने इसे स्पष्ट किया। डीबीएस पीजी कालेज के प्रबंधक ने अपने खिलाफ हुए जुर्माने के विरोध में आयोग में पुनर्विचार की अपील दाखिल की थी।

आयोग ने अपील को खारिज कर दिया है। रुड़की के कोमल ने डीबीएस पीजी कालेज देहरादून से कुछ जानकारियां सूचना के अधिकार के तहत मांगी थी। सूचना न मिलने पर मामला सूचना आयोग पहुंचा।
आयोग ने अक्टूबर में इस मामले में डीबीएस के प्रबंधक पर ढाई हजार का जुर्माना लगा दिया। प्रबंधक ने इसके खिलाफ पुनर्विचार की अपील दाखिल की थी।

सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि प्रबंधक ने लोक सूचना अधिकारी के पत्र का जवाब भी नहीं दिया और अपीलकर्ता को अभिलेखों का निरीक्षण कराने के लिए कानपुर बुलाया, जबकि कालेज देहरादून में स्थित है। आयोग ने इसे सूचना प्राप्त करने में बाधा उत्पन्न करना माना। यही नहीं सूचना उपलब्ध कराने में हुई देरी का कारण पूछने के आयोग के नोटिस का भी कोई जवाब प्रबंधक की तरफ से नहीं दिया गया।

सूचना आयुक्त विनोद नौटियाल ने सुनवाई में स्पष्ट किया कि जिस तरह लोक सूचना अधिकारी पर सूचना उपलब्ध न कराने पर जुर्माना लगाया जा सकता है, उसी तरह विभागीय अपीलीय अधिकारी भी इसके दायरे में आता है। नहीं तो यह लोक सूचना अधिकारी के साथ भेदभावपूर्ण रवैया हो जाएगा।

सूचना आयोग के इस निर्णय के बाद विभागीय अपीलीय अधिकारी भी जुर्माने के दायरे में आ गए हैं। अब वह अपनी गलती के लिए लोक सूचना अधिकारी को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकेंगे।

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