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जेएनयू में नक्सल समर्थक समूह की बैठक को लेकर झड़प

जेएनयू में नक्सल समर्थक समूह की बैठक को लेकर झड़प

माओवादियों के खिलाफ सरकार के अभियान के विरोध में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर में कथित नक्सल समर्थक खेमे की बैठक को लेकर छात्रों के समूहों में संघर्ष हो गया।

नक्सलियों के खिलाफ केंद्र की नीतियों के कथित विरोधी जेएनयू फोरम अगेंस्ट वार ऑन पीपुल ने शुक्रवार शाम यहां एक बैठक की। आयोजकों ने कहा कि बैठक सरकार के ऑपरेशन ग्रीन हंट के विरोध में थी।

भाजपा से जुड़ी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और कांग्रेस से संबंधित एनएसयूआई ने ऐसे समय इस बैठक का विरोध किया, जब छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों के अब तक के सबसे भीषण हमले में 76 सुरक्षाकर्मी मारे गए।

असिस्टेंट डीन ऑफ स्टूडेंटस प्रोफेसर सच्चिदानंद सिन्हा ने आयोजकों के विश्वविद्यालय परिसर का होने पर संदेह जताया और कहा कि बैठक के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई। छात्र इकाई के नेताओं ने कहा कि परिसर नक्सलियों के समर्थन के लिए इस्तेमाल नहीं होने दिया जाना चाहिए।

जेएनयू, एनएसूयआई के अध्यक्ष सुनील लल्हारिया ने कहा कि परिसर में आम माहौल नक्सलियों के खिलाफ है । नक्सल समर्थक छात्र समूह सीआरपीएफ जवानों के कत्लेआम पर जश्न मना रहे थे। हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उन्होंने हमारे खिलाफ बल प्रयोग किया।

महासचिव विनीत चतुर्वेदी ने कहा कि एबीवीपी ने आग्रह किया था कि बैठक की अनुमति न दी जाए।

चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि वे (नक्सल समर्थक) संगीत बजा रहे थे और दंतेवाड़ा की घटना को सही ठहरा रहे थे। हमने जब विरोध किया तो वे उग्र हो गए और हमसे भिड़ गए। हम उनके मुकाबले संख्या में बहुत कम थे, लेकिन हमने परिसर में राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों का विरोध जारी रखा।

उन्होंने कहा कि हम परिसर में 'नक्सलबाड़ी जिन्दाबाद, माओवाद जिन्दाबाद' जैसे नारों की गूंज बर्दाश्त नहीं कर सकते। उन्हें इस बैठक के आयोजन से परहेज करना चाहिए था।

जेएनयू फोरम अगेंस्ट वार ऑन पीपुल के सदस्य समर पाण्डेय ने कहा कि इस बैठक के लिए पूर्वानुमति ली गई थी। एनएसयूआई और एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने ऑपरेशन ग्रीन हंट के खिलाफ हो रही बैठक में खलल डालने की कोशिश की। उन्होंने वहां मौजूद लड़कियों से गलत बर्ताव किया और परदे फाड़ने का प्रयास किया। हमने बैठक के लिए इजाजत ली थी और उसकी सूचना संबंधी पर्चे भी चस्पा करवाए थे।

जेएनयू फोरम अगेंस्ट वार ऑन पीपुल द्वारा चिपकवाए गए पोस्टरों में बैठक के दौरान एक डॉक्यूमेंट्री दिखाए जाने, कविता पाठ और जामिया एवं जेएनयू के छात्रों द्वारा नाटक के मंचन के कार्यक्रम का विवरण दिया गया था।

वहीं प्रोफेसर सिन्हा ने कहा कि हम परिसर के सुकून में खलल नहीं डालने देंगे। हम सोमवार को समुचित कदम उठाएंगे।

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