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बच्चों की गुल्लक बनी बैंक

ैमूर के बच्चे पेरंटस की मनी प्रॉब्लम को दूर करने में शेयर बनने लगे हैं। इसमें बच्चों की ‘गुल्लक’ मददगार साबित हो रही हैं। मनी सेविंग करने वाले इन नन्हें-मुन्नों ने गुल्लक को ही ‘बैंक’ बना लिया है। बालचंद राम सरकारी कर्मचारी हैं।ड्ढr ड्ढr उन्होंने बताया कि जब वे हड़ताल पर थे तो बेटे दीपक को कॉपी की आवश्यकता पड़ी। हड़ताल टूटने पर कॉपी खरीदने की बात कह वे चुप हो गए। दीपक ने गुल्लक तोड़कर उसमें से ढाई सौ रुपए निकाले। उसके पैसों से न सिर्फ उसकी कॉपी बल्कि कुछ आवश्यक घरलू सामग्री भी खरीदी गई। श्री राम अपने बेटे के बैंक के बार में सुन आवाक रह गए। सौरभ दुबे चिल्ड्रेन गार्डेन स्कूल में पढ़ता है। उसने बताया कि मैं अपने दोस्तों के बर्थ डे पर पेरंटस से कुछ नहीं मांगता हूं। पिगी बैंक से पैसे निकाल गिफ्ट खरीद लेता हूं। दोस्तों का बर्थ डे पेरंटस पर बोझ नहीं बनता है। जया गर्ल्स स्कूल में पढ़ती है। कहती है कि पॉकेट मनी का इस्तेमाल खाने-पीने पर कम करती हूं।

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