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विकलांगों के लिए डीयू ने बढ़ाया हाथ

विकलांगों के लिए डीयू ने बढ़ाया हाथ

दिल्ली विश्वविद्यालय के करीब दो तिहाई विकलांग छात्रों के लिए आरक्षित सीटें पिछले वर्ष खाली रह गयीं थीं। ऐसे में इस सत्र में विकलांग छात्रों को कैंपस में बुलाने के लिए बिल्डिंगों से लेकर सभी संसाधनों को विकलांगों के लिहाज से तैयार करने में जुटा है

दिल्ली विश्वविश्वविद्यालय के कॉलेज जल्द ही विकलांगों के लिए लिफ्ट, पार्किंग जैसी सुविधाओं से युक्त होंगे। हालांकि दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेजों में विकलांगों, नेत्रहीनों के लिए इस तरह की व्यवस्था पहले से है। वर्तमान में कई कॉलेजों में विकलांगों के लिए सुविधाएं लेडी श्रीराम कॉलेज, श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, खालसा, गार्गी कॉलेज, मैत्रेयी कॉलेज, जानकी देवी महाविद्यालय, लक्ष्मीबाई कॉलेज, कमला नेहरू कॉलेज आदि में कुछ व्यवस्थाएं पहले से है और कई व्यवस्थाओं को अपग्रेड किया जा रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय में विकलांगों के लिए इस काम को अमली जामा पहनाने में ईओसी (इक्वन अपॉच्यूनिटी सेल)लगा हुआ है।

ईओसी की प्रमुख डा. निशा सिंह का कहना है कि 2007 में हमने काम शुरू किया था। 2009 के शुरू में हमने कई कॉलेजों को एक्सेस ऑडिट रिपोर्ट भेजी थी। उस रिपोर्ट में कॉलेजों को वहां विकलांगों के अनुसार बिल्डिंग में कुछ सुविधाएं बढ़ाने की बात कही थी। हमने कॉलेजों में रैंप, टॉयलेट, साइन एज, पार्किंग आदि बनाने की सिफारिश की। उन्होंने कहा कि कई कॉलेज इस दिशा में काफी तेजी से काम कर रहे हैं। कई कॉलेजों को टेकटाइल बनाने की बात कही थी। टेकटाइल एक तरह की पट्टियां होती है जिस पर नेत्रहीन लोग एक जगह से दूसरी जगह इन पट्टियों पर चलते हुए पहुंच जाते हैं।

श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के प्रधानाचार्य पी.सी.जैन का कहना है कि विकलांग के लिए लिफ्ट बनाई जा रही है। उम्मीद है कि इस महीने तक काम पूरा हो जाएगा। यह लिफ्ट विकलांगों के लिहाज से काफी सुविधाजनक होगी। इस लिफ्ट से उनको पहले फ्लोर पर चढ़ने में किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होगी। इसके अलावा कॉलेज में रैंप, टॉयलेट आदि पहले से ही बने हुए थे। विकलांगों के लिए सुविधाओं को हम और बेहतर बनाने के बारे में लगातार काम कर रहे हैं। कमला नेहरू कॉलेज की प्रधानाचार्य डा. मिनोती चटर्जी ने बताया कि उनके कॉलेज में विकलांगों की सुविधा के लिए रैंप, साइन एज, पार्किंग और टॉयलेट बना हुआ है। उन्होंने कहा कि विकलांगों को लेकर यहां लगातार काम चल रहा है।

मैत्रेयी कॉलेज की प्रधानाचार्य सविता एम. दत्ता ने बताया कि हमारे कॉलेज में रैंप, डंब रूम है। पार्किंग, लिफ्ट आदि पर काम चल रहा है और ये जल्द ही तैयार हो जाएगी। साथ ही छात्रों के लिए ब्रेल, साइन एज आदि सॉफ्टवेयर आदि पर काम चल रहा है।

इसलिए जरूरी

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के विभिन्न कॉलेजों में विकलांग छात्रों के लिए 1700 सीटें है लेकिन इनमें बमुश्किल डीयू के 375 छात्र ही दाखिला लेने पहुंचते हैं।

ये हैं सुविधाएं 

विकलांग छात्रों के लिए रैंप, टॉयलेट, साइन एज की सुविधाएं है। कमला नेहरू की प्रधानाचार्य मिनोती ने कहा कि कैंटीन से सीधे ऑडीटोरियम तक जाने के लिए रैंप बन गया है।

ये होगा नया

दिल्ली विश्वविद्यालय के तमाम कॉलेजों में लिफ्ट, पार्किंग, टेकटाइल आदि पर काम चल रहा है। लिफ्ट बन जाने से विकलांग छात्रों का एक फ्लोर से दूसरे फ्लोर जा सकना आसान होगा।

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