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खाती-पीती दिखती हैं, और मस्त हैं

खाती-पीती दिखती हैं, और मस्त हैं

भारत समेत दुनिया भर की लड़कियां छरहरी होने के लिए मरी जा रही हैं। पागलपन की हद तक क्या-क्या जतन नहीं कर रहीं। खासकर फिल्मों और टीवी की दुनिया में तो महिला किरदारों का वजन खास माने रखता है और परफेक्ट फीगर एक अनिवार्य विशेषता बन गया है। पर ऐसे में शिखा तलसानिया और पुष्टि को अपने प्लस साइज की कोई चिंता नहीं है। वे अपने फीगर के साथ खासी सहज हैं और आत्मविश्वास से भरी हुई हैं।
दरअसल अपनी बनावट को सहजता से जीना आपकी शख्सियत और आत्मविश्वास में चार चांद लगा सकता है। शिखा तलसानिया और पुष्टि का दिल तो इतना बड़ा है कि उन्होंने साफ कहा- ओफ-ओ.. ऐसी फालतू बातों की फिक्र कौन करे!

हिन्दी फिल्मों के टुनटुन (उमा देवी), भगवान, असित सेन जैसे कलाकार याद तो होंगे आपको। उनमें क्या एक जैसा था? एक तो वे सभी हास्य कलाकार थे और दूसरे वे थोड़े हेल्दी थे। हेल्दी इसलिए क्योंकि आजकल तो ऐसा ही कहना पड़ता है। लंगड़े को लंगड़ा कहना उसके आत्म सम्मान को ठेस पहुंचाने जैसा है भई। लेकिन आपको दो ऐसे कलाकारों से मिलवाते हैं जिन्हें मोटा कहने से गुदगुदी होती है और अपने मोटापे को लेकर वे काफी उत्साहित भी हैं।

शिखा तलसानिया (वेक अप सिड) और पुष्टि (माही वे) ऐसी ही दो सौभाग्यशाली कलाकार हैं जिन्हें ईश्वर ने भरा पूरा शरीर दिया है यानी वे खाते-पीते घर की हैं। अब बिना खाए सेहत बनती है भला। इन्हें अपने मोटापे को लेकर कोई शिकायत नहीं है क्योंकि अन्य बातों के साथ-साथ इनके हृष्ट-पुष्ट शरीर ने ही टीवी धारावाहिकों से लेकर फिल्मों का रास्ता खोला है। मुम्बई के बांद्रा कुर्ला कॉम्पलेक्स स्थित ट्राइडेंट होटल के ओह-टू-टू रेस्तरां में नरम-मुलायम सोफे पर बैठ इन दोनों अभिनेत्रियों ने चाय की चुस्कियों के साथ अपने हेल्दी होने पर बेसाख्ता हंसते हुए बहुत सारी बातें की हमसे।

हम भारतीय टेलीविजन व सिनेमा के इस दौर में पहुंच गए हैं जहां शरीर का भारी होना कोई समस्या नहीं है?

शिखा: आप मोटी कह सकती हैं। इसमें बुरा क्या है।

पुष्टि: बिल्कुल ठीक। हमें मोटा कहे जाने से कोई परेशानी नहीं है।

शिखा: यकीनन, हमें इससे कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। बल्कि इसी बहाने हमने फिल्मों और टीवी में मोटापे के लिए जगह बनाई। जैसे अन्य चरित्र हैं, वैसे मोटी लड़की का भी है जो हमेशा भूख की मारी होती है और थोड़ा हंसोड़ है।

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ऐसी फिल्में बनने लगी हैं?

पुष्टि: एक हद तक आप कह सकती हैं। अभी तक जो ढांचा बना था, उसमें फिट होना कठिन था लेकिन अब जो नई फिल्में बन रही हैं, उन्होंने इस सोच में बदलाव किया है।

शिखा: ठीक बात है। ऐसा इसलिए हो पाया है क्योंकि ‘वेक अप सिड’ जैसी यथार्थवादी फिल्में बनाई जा रही हैं और लोग इस बात को समझने लगे हैं कि असल जिन्दगी में हर कोई हर समय सुंदर नहीं दिख सकता है।

लेकिन क्या आपको नहीं लगता कि छरहरेपन को लेकर बेवजह बवाल मचा हुआ था? हर कोई साइज-जीरो का दिखना चाहता था?

शिखा: मुझे लगता है कि करीना के ऐसा करने से ही हाय-तौबा मची थी।

पुष्टि: बिल्कुल। लेकिन यह सही तस्वीर नहीं है। भारतीय महिलाएं कभी भी छरहरी नहीं रही हैं। हमने तो हमेशा से ही मांसल सौंदर्य को सराहा है। पुरानी फिल्मों की अभिनेत्रियों को ही देखिए- मीना कुमारी से लेकर मधुबाला तक- कोई भी दुबली-पतली नहीं थीं।

शिखा: इतनी पुरानी बात क्यों। आज की माधुरी दीक्षित को ले लीजिए। आपने उनका गदराया हुआ बदन नहीं देखा।

पुष्टि: मैं भी इस बात से पूरी तरह सहमत हूं। मुझे लगता है कि कुदरत ने हमें भरपूर दिया है। फिर हमें अलग दिखने की क्या जरूरत है। औरों की बात छोड़िए, अपनी देवियों को ही देखिए। क्या उनको देख कर ऐसा नहीं लगता कि छरहरा होना छलावा है। असली सौंदर्य तो मांसल होने में है।

शिखा: ईमानदारी से कहूं तो मेरे शरीर पर पड़नेवाले बल मुझे ज्यादा प्यारे हैं। दुनिया क्या कहती है, इसकी रत्ती भर भी परवाह नहीं है मुझे।

पुष्टि: मैं भी यही कह रही हूं। मुझे यह स्वीकार करने में जरा भी संकोच नहीं है कि कोई कुछ भी कहे, मर्दो को भी ये बल बहुत पसंद हैं।

वाकई?

शिखा और पुष्टि: बिल्कुल।

पुष्टि: जितने मर्दो को मैं जानती हूं, उन सबको हमारी बल खाती काया बहुत पसंद है।

शिखा: मैं भी तो वही कह रही हूं। (हंसते हुए) यह अलग बात है कि मेरे प्रेम संबंध एक महीने से ज्यादा नहीं चले।

पुष्टि: मैंने तो इसके उलट, खुद ही उन प्रेमियों को छोड़ा और मेरे संबंध लंबे समय तक चले क्योंकि मैंने अपने से अधिक उम्र के पुरुषों के साथ डेटिंग की।

लेकिन क्या आपके घर वाले कुछ नहीं कहते? उन लोगों को कभी तो मोटापा खराब लगता होगा?

शिखा: आपने मेरे परिवार को देखा है। मेरे पिता टिक्कू तलसानिया हैं। क्या उनको देखने के बाद भी आपको कुछ कहना है। (हंसती हैं)।

पुष्टि: मेरा परिवार तो इस लिहाज से काफी संतुलित है। आपने मेरे भाई व्रजेश हीरजी को देखा होगा। कितना छरहरा है। केवल मैं ही थोड़ा भारी हूं। हां, मुझे घर वाले कहते तो हैं कि तेरी शादी कैसे होगी लेकिन किसी कड़वाहट के साथ नहीं। वे सलाह भी देते हैं कि मुझे जिम जाना चाहिए।

शिखा: हां, ऐसा तो मुझे भी कहा जाता है कि जिम जाओ। मेरे पिता तो जिम के दीवाने हैं और वे बड़ी जल्दी अपना वजन कम कर लेते हैं। मुझे भी ऐसा करना चाहिए, घर वाले चाहते हैं। लेकिन मुझे जिम जाना बिल्कुल पसंद नहीं।

पुष्टि: यहां मैं थोड़ा अलग हूं। जब भी मैं जिम जाना शुरू करती हूं, मुझे लगता है कि मेरा वजन बढ़ रहा है। (दोनों ठहाका लगाती हैं)।

शिखा: मैं आपको बताऊं कि मेरे लिए तो दोहरी मार थी। एक तो मैं मोटी थी और पढ़ाई में भी कुछ खास नहीं थी। लिहाजा लोग मुझे सलाह पर सलाह देते रहते थे। एक बार तो यह सुनने को मिला कि एक्टर तो बन ही जाएगी। हां, लेकिन सिर्फ आंटियों को ही क्यों दोष दूं। एक बार एक अभिनेत्री ने मुझे बड़ी सीरियस सलाह दी थी कि लीपोसक्शन करा ले, सुंदर लगेगी। मेरा मन हुआ कि मैं उसे जान से मार दूं।

पुष्टि: तुझे ऐसा कर देना चाहिए था। लेकिन बात वहीं खत्म नहीं होती। धीरे-धीरे आप सीख जाते हैं, लोगों की बातों पर ध्यान न देना और खुश रहना।

तुमने टीवी और फिल्म तथा नाटकों में काम तो किया था। वह अनुभव कैसा रहा?

शिखा: मैंने कॉलेज तक ही थियेटर किया। टीवी और फिल्मों में भी काम मिला। लेकिन हर बार वही कहानी- एक ऐसी मोटी लड़की की भूमिका जो या तो खाने के पीछे भागती है या फिर मर्दो के। मैं ऐसा नहीं चाहती थी। इसलिए मैंने कैमरे के पीछे रह कर काम करने का फैसला किया और यह ठीक रहा।

पुष्टि: मेरे साथ भी ऐसा ही था। पेटू बच्चे की भूमिका करके मैं तंग आ गई थी।। मैं कुछ बेहतर करना चाहती थी। लिहाजा, छह साल पहले मैं गोवा चली गई और वैकल्पिक चिकित्सा जैसे एंजेल थेरेपी और रेकी का अभ्यास किया। इससे मुङो काफी सुकून मिला।

शिखा: अरे वाह। तुम तो आध्यात्मिक भी हो।

पुष्टि: हां, मेरा आध्यात्मिक रुझान है। मैं शराब-सिगरेट नहीं पीती। मैं ध्यान करती हूं और योग करती हूं। मेरे दोस्त मुङो कहते हैं कि तूने गोवा में अपना समय बर्बाद किया। (मुस्कराती है)।

शिखा: (चेहरे पर बिना किसी भाव के) तुम्हारे दोस्त बिल्कुल ठीक कहते हैं।

पुष्टि: तुम्हें विश्वास नहीं होगा लेकिन मेरे दोस्त जब भी गोवा आए, उन्होंने कोई नशा नहीं किया। उन्होंने मुझसे कहा कि यहां आकर उन्हें अच्छा लगा।

शिखा: मैं कोई नशा तो नहीं करती लेकिन मैं तुम्हारे पास गोवा नहीं आऊंगी। और तुम यहां क्या कर रही हो? तुम्हें तो हिमालय जाना चाहिए और तपस्या करनी चाहिए। (हंसती है)।

पुष्टि: मैं भी कुछ ऐसा ही सोच रही हूं। मुझे लगता है कि मेरा ध्यान और मेरी आध्यात्मिकता मेरे लिए बड़े काम की है। मैंने खलील जिब्रान और ओशो को खूब पढ़ा है।

शिखा: मैं तो खोखलापन महसूस कर रही हूं- मैं सिर्फ नैन्सी ड्रयू को पढ़ती हूं।

पुष्टि: (हंसते हुए) लेकिन इससे मदद मिलती है। छह साल पहले जब मैंने मुम्बई छोड़ा था तो खुद से कहा था कि जब मैं वापस आऊंगी तो यशराज फिल्म्स के बैनर तले हीरोइन का रोल करूंगी। और अब आपके सामने है। मुझे यह पता थोड़े ही था कि यशराज टीवी सीरियल..

तो अब तुम दोनों ने कर दिखाया है, अपनी शर्तो पर। क्या तुम खुश हो?

पुष्टि: हां, अभी तो यह शुरुआत है लेकिन मैं खुश हूं कि लोगों ने माना तो सही कि मोटे लोग भी काम के होते हैं। उनकी भी लाइफ है। उनमें भी असुरक्षा की भावना है, पेचीदगियां हैं, बाधाएं हैं लेकिन ये तो धरती की अप्सराओं के साथ भी होता है।

कोई असुरक्षा या जटिलता?

शिखा: हां है ना। हमारी अपनी किस्म की हैं। वेक अप सिड का वह सीन याद कीजिए जिसमें लक्ष्मी अपने मोटापे को लेकर काफी दुखी है। यह सच है। मुझे भी मन करता है कि मैं बिकनी पहनूं या किसी स्टोर में जाकर परफेक्ट फिट कपड़े खरीदूं। लेकिन ऐसा होता है। मोटे-पतले होने के अलावा जीवन में और भी बहुत कुछ है।

पुष्टि: लेकिन मैंने वह सब कुछ किया है। मैंने बिकनी भी पहनी है और घुटनों से ऊपर तक का गाउन भी। किसी को यह लगता है कि मेरा पेट बड़ा है या मेरी जंघाएं मोटी हैं तो ठेंगे से। मुझे अच्छा लगा इसलिए मैंने किया। असुरक्षा के घेरे से बाहर तो आना ही होगा।

आगे क्या सोचा है?

पुष्टि: अभी तो वही- ‘माही वे’।

शिखा: (मनोज कुमार की अदा की नकल करते हुए) अभी तो मैं संघर्षशील कलाकार हूं। मुझे अच्छी स्क्रिप्ट की तलाश है।

पुष्टि: हम दोनों ने एक दूसरे में अपनी सखी तलाश ली है और इसे भरपूर जीएंगे।

शिखा (हमसे): और जब अगले साल हमें हमारी मोटी मित्रता का पुरस्कार मिलेगा तो अपने माता-पिता व ब्वॉयफ्रेंड्स के सामने धन्यवाद देंगे और हां, पुष्टि के ईश्वर और देवदूतों के सामने भी।

प्लस साइज.. डोन्ट वरी! जियो जी भर के

ऐसी बहुत सारी पहल हुई हैं जिनमें महिलाओं को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया गया है कि वे अपने मोटापे को जी भर के जिएं। थाइलैंड में जम्बो क्वीन नाम से एक प्रतियोगिता होती है जिसमें 80 किलो से अधिक वजन की महिलाएं ही हिस्सा ले सकती हैं। कई लेखकों ने इस विषय पर किताबों लिखी हैं- मैरलिन वान की यू डोंट हैव टू अपोलोजाइज फॉर योर साइज, सोंड्रा सोलोवे की टिपिंग दि स्केल ऑफ जस्टिस: फाइटिंग वेट बेस्ड डिसक्रिमिनेशन, लिण्डा फिन की लाजर्ली हैप्पी: चेंजिंग योर माइंड एबाउट योर बॉडी।

अमेरिका में दि पैडेड लिलीज, बिग बर्लेस्क्यू और दि फैट बॉटम रिव्यू जैसे ग्रुप मोटी महिलाओं का शो आयोजित करते हैं। ऐसे कई गैर-सरकारी संगठन भी हैं जो मोटापे के आधार पर होने वाले भेदभाव के खिलाफ अभियान चलाते हैं।


यार तू, प्लस साइज को कैटवॉक कराएगी मालविका नन्दा
मीनाक्षी

पापा का गारमेंट का बिसनेज है। बचपन से तरह -तरह के डिजाइनर कपड़े पहनने का बहुत शौक रहा है। हमेशा मूड के मुताबिक ड्रेस चेंज करती रहती हूँ। जैसे-कभी स्कर्ट के ऊपर ट्रेडिशनल कुर्ता पहन लिया, तो कभी कुछ और। अक्सर ऐसी असमान्य सी ड्रेसों को मैं डिजाइन भी खुद ही करती हूँ। मेरी बचपन की सहेली डिजाइनर आस्था बहल ने मेरे खोजी और स्लाइलिश ड्रेसिंग सेंस को देखकर ‘विल्स फैशन शो’ में नया कलेक्शन उतारने की सोची। जब इस बारें में उसने मुझसे बात की, तो पहले मैं हंस पड़ी और सीधे इंकार कर दिया- यार, तू प्लस साइज को रैम्प पर चलवाएगी, मैं तो मॉडल की किसी भी कैटेगरी में नहीं आती। लेकिन आस्था ने मेरी एक न चलने दी। कहा- यह क्लेशन तेरी पर्सनेलिटी पर खूब फबेगा। जैसे बंजारे लोग कपड़े पहनते हैं और बड़ी मस्त तरह से इधर-उधर फिरते, नई जगह खोजते हैं। मैंने ‘येस’ कर दिया और तेज रोशनी के बीच रैम्प पर चली। रैम्प पर चलने से पहले तो वहां मौजूद तमाम लोगों को यकीन ही नहीं था कि मैं मॉडल हूं। कोई नोटिस ही नहीं कर रहा था।

मुझे पता है कि मैं मोटी हूं, पर अपनी फीगर से खुश हूं और मेरे दोस्त भी मुझे इसी रूप में एक्सेप्ट करते हैं। अगर मैं पतली हो जाऊं तो उनका कहना है कि मैं अपनी चार्मिग पर्सनैलिटी खो दूंगी। दोस्त मुझे प्यार से मोटू या मोटी पुकारते हैं तो कुछ ने मुझे ‘फायरब्रांड’ नाम दे रखा है। मस्ती मेरा स्वभाव है। मैं अपने फीगर के साथ कम्फर्टेबल हूं।

मेरे जैसा था लक्ष्मी का किरदार

टीवी और फिल्म कलाकार टिक्कू तल्सानिया व रंगमंच कलाकार दीप्ति की बेटी शिखा कहती है कि उसने यह कभी नहीं सोचा था कि वह अभिनय की दुनिया में कदम रखेगी। उसके भारी भरकम शरीर को देख कर शायद कोई भी यही कहता। इसलिए वह झलक दिखला जा 2 और 3, इंडियन आइडल 3 और एक खिलाड़ी एक हसीना जैसे टीवी शो के लिए फ्लोर मैनेजर व एसोसिएट लाइन प्रोडय़ूसर बन कर ही खुश थी। अचानक वेक अप सिड में मौका मिला। शिखा ने इस फिल्म में रणबीर कपूर की सबसे अच्छी दोस्त लक्ष्मी की भूमिका की है। उसका कहना है कि लक्ष्मी जैसी थी, उसी में खुश थी। उसे अपने मोटे होने का जरा भी मलाल नहीं था। और वह असल जिन्दगी में भी तो वैसी ही है।        
शिखा तल्सानिया

मोटी हूं पर खुश हूं

कलाकार व्रजेश हीरजी की बहन पुष्टि टीवी के लिए नई नहीं है। सबसे पहले वह बालाजी के हम पांच धारावाहिक में छोटी बेटी बनी थी और उसके बाद कई फिल्मों व धारावाहिकों में काम किया। कुछ समय बाद वह गोवा चली गई क्योंकि उसे मोटे व पेटू बच्चे की भूमिका से चिढ़ होने लगी थी। उसकी वापसी सोनी पर आ रहे धारावाहिक माही वे से हुई। उसका कहना है कि आखिर उसे वह भूमिका मिल ही गई जिसमें वह अपने जैसी लगती है। कहती है कि बेशक वह मोटी है लेकिन वह उसमें खुश है जैसे माही है। एक पेशेवर वैकल्पिक चिकित्सा विशेषज्ञ और बेली डांसर पुष्टि बड़े आत्म विश्वास से कहती है कि उसे अपने मोटे होने पर गर्व है। 
पुष्टि

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