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शादी के बाद क्यों नहीं रहती पहले जैसी कमर

शादी के बाद क्यों नहीं रहती पहले जैसी कमर

शादी क्या हुई, शरीर पर कंट्रोल ही खत्म हो गया। फैलते गए, फैलते गए और फिर पुरानी फोटो में अपने छरहरे बदन को देख दिल को तसल्ली देते रहे। और चारा भी क्या है क्योंकि सोफे पर पसर कर साथ टीवी देखने और भकोसने के अलावा किया क्या।

हमें पूरा विश्वास है कि आप भी इस बात से पूरा इत्तेफाक रखते होंगे। अधिकांश लोगों के साथ यही देखने को मिलता है कि शादी हुई नहीं कि मोटापा आ गया। महिलाओं के साथ यह चर्चा आम है क्योंकि शादी से पहले खुद को फिट और हिट रखने के लिए वे न जाने क्या क्या नहीं करती हैं और जैसे ही शादी के फेरे लिए, फिटनेस के फेरे बंद हो गए। जहां तक मर्दो की बात है तो उन्हें पत्नी के हाथ का खाना इतना पसंद आने लगता है कि खाए जाओ, खाए जाओ, पत्नी के गुण गाए जाओ।

लेकिन यह आम विश्वास कोरी कल्पना नहीं है। यह अब शोधों से भी साबित हो गया है कि वाकई ऐसा होता है। पिछले सप्ताह, एथेंस में एक प्रेस कांप्रेंस में दिमित्रिस कियोरसिस, प्रेसिडेंट, हेलेनिक मेडिकल एसोसिएशन ने यह उजागर किया कि शादी के बाद सबसे गंभीर स्वास्थ्य समस्या यदि कोई है तो वह है मोटापा यानी पेट का पंडाल हो जाना। शादीशुदा पुरुषों के पेट अविवाहितों से तकरीबन तीन गुना बड़े हो जाते हैं जबकि कुंवारी लड़कियों से दोगुना बड़ा पेट शादीशुदा महिलाओं का हो जाता है।

यह सर्वेक्षण 20 से 70 साल के 17,000 विवाहित जोड़ों पर किया गया और यह निष्कर्ष निकला कि इस मोटापे के दो कारण हैं। एक- शादीशुदा लोग सोफे पर एक साथ बैठ कर टेलीविजन देखते हुए खूब खाते हैं जबकि कुंवारे ऐसा नहीं करते। और दूसरा- शादी के बाद कुछ समय तक एक दूसरे का साथ इतना अच्छा लगता है कि व्यायाम, योग या जिम के बारे में सोचने का न तो दिल करता है और न ही फुर्सत मिल पाती है।

आप खूब जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है। शादी से पहले हमें कितनी मेहनत करनी होती है खुद को फिट और आकर्षक दिखाने के लिए ताकि पल भर के लिए कोई हमें प्यार कर ले। जैसे ही यह तलाश खत्म होती है तो जीवन के सबसे खास दिन, शादी के दिन का इंतजार होने लगता है। खयाल रहे, उसके बाद तो उस दिन की फोटो देख कर ही पूरा जीवन बिताना है। बहरहाल, शादी होते ही हनीमून आंखों में तैरने लगता है और उसके बाद तो कहना ही क्या। किसी पहाड़ी होटल के कमरे में बेड पर पड़े-पड़े खाने का ऑर्डर देना और डियर के साथ बीयर पीना कितना अच्छा लगता है, यह क्या हमें बताना पड़ेगा। होटल के रेस्तरां में बैठ आइसक्रीम या कुछ मीठा हो जाए की तर्ज पर कुछ मीठा खाना कैसे छोड़ा जा सकता है। और फिर रात में प्रेम अगन में तपे शरीर को ढेर सारे नाश्ते की ठंडक भी तो चाहिए।

जब तक आप मून से हनी चख कर वापस आते हैं कि अब विधिवत विवाहित जीवन की रस्मों को निभाया जाए, तब तक आप मोटापे की तरफ चंद कदम बढ़ा चुके होते हैं। यहीं से बात बिगड़नी शुरू होती है। फिर आप जानकारों, रिश्तेदारों, दोस्तों की ओर से आपके गृहस्थ बनने की खुशी में दिए जाने वाले प्रीति भोज को कैसे टाल सकते हैं। इसके बाद वक्त हो जाता है पत्नी के हाथ का बना स्वादिष्ट खाना खाने का क्योंकि कुंवारेपन के दिनों में जल्दी-जल्दी कुछ भी खाकर निकल पड़ने के दिन जो खत्म हो गए। इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि कुछ पत्नियां यह सीख गांठ बांध कर आई होती हैं कि पति के दिल में उतरने के लिए रास्ता उनके पेट से होकर जाता है। अक्सर यह नुस्खा कामयाब हो जाता है। चाहे जो भी हो, शादी के एक साल बाद ही आपकी कमर का घेरा बढ़ जाता है और पैंट की कमर छोटी पड़ने लगती है। बच्चे हो गए तो औरतों के शरीर पर सलवटें दिखाई देने लगती हैं और पति तो उनका साथ देने के लिए मोटे होते जाते हैं। शादी के कुछ साल बाद ही दोनों एक जैसे दिखने लगते हैं, कम से कम उनके पेट के बारे में तो यह कहा ही जा सकता है। तो, क्या कारण है कि शादी होते ही सुंदर या खूबसूरत दिखने की ललक खत्म हो जाती है? क्या इसलिए कि अब इम्प्रेस करने के लिए कौन बचा। जिसे करना था, वह तो घर में ही है। क्या शादी होते ही सपनों का संसार खत्म हो जाता है। न तो किसी को राजकुमार की तलाश होती है और न ही किसी को राजकुमारी की। वो रातों का जगना, सपनों में खो जाना, एक झलक को तरसना, उनका नाम सुनते ही सिहरन हो जाना, यह सबकुछ पानी के बुलबुले की तरह मिट जाता है। सोट यहां तक आ जाती है कि पेट बढ़ता है तो हमारी बला से। अब किसे दिखाना है। अब तो कमाने की चिंता है, बच्चों के बेहतर भविष्य की चिंता है।

हाल के शोध भी ऐसा ही साबित कर रहे हैं। मजेदार बात यह है कि यदि इनमें से कोई अपनी काया को लेकर चिंतित दिखाई दिया तो समझ जाइए कि कुछ न कुछ गड़बड़ है। कोई दूसरा या दूसरी तो नहीं आ गई जिन्दगी में। अधिकांश मामलों में ऐसा पाया जाता है। तो फिर क्या करें। मोटापे को लेकर परेशान होने की कोई जरूरत नहीं हैं क्योंकि इसका विकल्प तलाशने की कोशिश करने का दूसरा पहलू और दुखदायी हो सकता है। घबराइए मत। यह आपको ही तय करना है।

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