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बीरबल की खिचड़ी है मीठापुर आरओबी

मीठापुर रलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) मानो बीरबल की खिचड़ी। पूरा होने का नाम ही नहीं ले रहा। ढाई साल हो गए, पर अब तक यह तय ही नहीं है कि कब पूरा होगा। 31 मार्च तक इसे बनकर तैयार हो जाना है, लेकिन 40 फीसदी काम भी पूरा नहीं हो पाया है। हार्डिग रोड और बुद्ध मार्ग के साथ ही गया लाइन रोड में सिर्फ पिलर का काम हुआ है। केवल जीपीओ गोलम्बर के पास पिलर के ऊपर पुल बनाने का काम चल रहा है।ड्ढr ड्ढr इस धीमे काम का खामियाजा भुगत रहे हैं 10 लाख शहरवासी। पश्चिमी पटना के लोगों को इस आरओबी के नहीं बनने से बस स्टैण्ड जाने में भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। स्टेशन रोड की भीड़भाड़ का सामना करते हुए चिरैयाटाड़ पुल से पार होकर करबिगहिया के जाम से जूझते हुए बस स्टैण्ड जाना पड़ता है। यहीं नहीं पुनपुन-मसौढ़ी-गया जाने वालों को मीठापुर सब्जी मंडी की गंदगी और जाम का सामना करना पड़ता है। इस पुल के बन जाने से चिरैयाटाड़ पुल पर ट्रैफिक भार भी आधा हो जाएगा। यही नहीं व्यस्त बुद्ध मार्ग पर भी ट्रैफिक सहज हो जाएगा।ड्ढr ड्ढr हालांकि मीठापुर आरओबी के निर्माण में जमीन अधिग्रहण से लेकर राज्य सरकार और ‘इरकॉन’ के बीच के समन्वय में कई पेच हैं। सब कार्य कछुआ चाल में है। अलबत्ता पथ निर्माण मंत्री प्रम कुमार ने पिछली गलतियों की पुनरावृत्ति न होने और निर्माण कार्य में तेजी लाने का भरोसा दिलाया है। दरअसल 123.53 करोड़ की लागत वाले इस आरओबी के जून 2006 में निर्माण की स्वीकृति मिलने के बाद भी कागजी प्रक्रिया पूरी करने में एक साल लग गया। इस दौरान फाइलों में ही निर्माण की मशक्कत चलती रही।ड्ढr ड्ढr मई 2007 में अंतिम तौर पर स्वीकृति मिल पायी। इसके बाद भी कई तकनीकी समस्याओं ने निर्माण कार्य में परशानी पैदा की। पहले हार्डिग रोड साइड में पुल के स्लोप को बदलने का निर्णय और वहां मौजूद लोहिया जी की प्रतिमा हटाने को लेकर जबरदस्त परशानी हुई। फिर गोलम्बर के पास डाक एवं तार विभाग और दक्षिणी किनार के तरफ बस स्टैण्ड वाले साइड में बिजली बोर्ड की जमीन अधिग्रहण का मामला फंसा है।ं

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