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पानी की बरबादी या लापरवाही

गर्मी, पानी की कमी, तपती धरती, बिगड़ता पर्यावरण, सब मिलकर हमें पानी की एक-एक बूंद बचाने व संरक्षण करने का संकेत देते हैं। रसोई के पानी व वर्षा के जल को भी अधिक से अधिक पृथ्वी के अंदर रोकने के लिए अनेकों उपाय किए जा रहे हैं, योजनाएं बन रही हैं। कानून भी बनाए गए हैं। जल की बरबादी पर अर्थदंड का भी प्रावधान है, परंतु यह सब कुछ लोगों तक ही सीमित है। क्रियान्वयन की दृष्टि से कुछ हो नहीं रहा। एक तरफ लोग पानी की कमी से बेहाल हैं, दूसरी तरफ खाने-पीने तथा रोजमर्रा की चीजों के लिए अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे तैसे काम चलता है, जीना मुहाल है। कहीं धड़ल्ले से मनमाना जल व्यय किया जाता है। इसके अलावा कूलरों की टंकियों तथा ओवरहेड टैंकों से अक्सर जहां-तहां जल लगातार कई घंटे तक रोजाना ही बहता रहता है जो अत्यंत ही दर्दनाक और अमानवीय है। जहां पानी की अधिक कमी नहीं है वहां यह दृश्य अक्सर देखे जा सकते हैं। फर्श धोना या पौधे सींचना फिर भी पर्यावरण या स्वच्छता का पोषण करते हैं, परंतु अकारण जल बहाना तो अवश्य ही अपराध है।
इंदिरा सदावर्ती, 35, दयानंद विहार, नई दिल्ली

बत्तखों की सुध नहीं
लोधी गार्डन, सूखी झील में कई बत्तखों को मरी हुई अवस्था में पड़ा पाया गया। बत्तखों की संख्या चाहे कितनी भी हो पर सवाल इतना है कि प्रशासन के इंतजामात पक्षियों के प्रति कुछ भी नहीं हैं। वातानुकूलित गाड़ियों में सुबह की सैर को आने वाले सज्जनों, पेड़ों के झुरमुट में बैठे जोड़े, सायंकाल गार्डन में पिकनिक मनाते परिवार व खाली समय में पेड़ों के नीचे आराम फरमाते राहगीर, क्या किसी को भी मूक पक्षियों की सुध नहीं? काश! ये भी घरों के पालतू पक्षी होते?
राजेन्द्र कुमार सिंह, एच-101, आर्य अपार्टमेंट, सेक्टर-15, रोहिणी, दिल्ली

घरेलू नौकरानियों की सुरक्षा
अपनी व अपने परिवार की उदरपूर्ति के लिए काम करने वाली घरेलू नौकरानियों के लिए उनके जीवन की सुरक्षा की गारंटी का प्रश्न, अति-महत्वपूर्ण बन कर सामने आ रहा है। मात्र आठ सौ रुपए से हजार रुपए के मामूली मासिक वेतन पर काम करने वाली घरेलू नौकरानियों का जीवन पिछले कई वर्षो से खतरे में पड़ा हुआ है।
इन नौकरानियों को अपने मालिकों के अत्याचारों, प्रताड़ना, बलात्कार इत्यादि का शिकार बनना पड़ रहा है। गरीब परिवारों से संबंधित होने के कारण नौकरानी के रूप में कार्य करने वाली महिलाओं को कार्य के समय असीम वेदनाओं का शिकार बनना पड़ता है। प्राय: मालिक अपने घरों में होने वाली वारदातों की जिम्मेवारी अपनी इन नौकरानियों पर डाल देते हैं। बिना थाने में रिपोर्ट लिखाए, यह मालिक थाना-पुलिस के साथ मिलकर स्वयं ही नौकरानी को सजा देने का निर्णय कर लेते हैं। दिल्ली सरकार व महिला समर्थकों से अनुरोध है कि इन घरेलू नौकरानियों के जीवन को सुरक्षित बनाने के लिए समुचित प्रबंध व उपाय करें।
किशन लाल कर्दम, बी-514, जे. जे. कॉलोनी हस्तसाल रोड, उत्तम नगर, नई दिल्ली

शर्मनाक
ढोंगी बाबाओं द्वारा भक्ति व सत्संग की आड़ में सेक्स रैकेट चलाने, अश्लील हरकतों में लिप्त पाए जाने तथा अपहरण जैसे घोर अपराधों को अंजाम देने की घटना ने समस्त सच्चे भारवासियों का सिर शर्म से झुका दिया है। भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति से प्रभावित होकर अनेक विदेशी अपना घर-बार छोड़ भारत के विभिन्न धार्मिक शहरों-नगरों में स्थायी रूप से बस गए हैं व वे हमारी सभ्यता एवं संस्कृति का पूरी ईमानदारी व श्रद्धा से अनुपालन कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर अपने ही देश में इस प्रकार के पाखंडी बाबाओं द्वारा धर्म, भक्ति एवं श्रद्धा को आड़ बनाकर इस प्रकार के घोर अनैतिक अपराधों को अंजाम देना अत्यंत दुखदायी बात है।
भगत थापा ‘बंधु', 6/69, खिचड़ीपुर, दिल्ली

कंपोस्ट बनाएं
कभी एनसीडी कम्पोस्ट प्लांट ओखला में मशीनों द्वारा खाद बना करती थी। इस तरह के प्लांट सरकार को और भी लगाने चाहिए जिससे किसानों को व पेड़ पौधों में रुचि रखने वालों को अच्छी व सस्ती खाद मिल सके। इससे बेरोजगारों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे व सरकार का खाद की बिक्री द्वारा आमदनी का जरिया भी बढ़ेगा।
श्याम सुन्दर, संजय बस्ती, तिमारपुर, दिल्ली

रेल में ठंडा पानी
हर साल गर्मियों में अधिकांश रेल यात्री पेयजल के लिए चिंतित रहते हैं। शीतल पेय बेचने वाले रेल प्लेट फार्मो पर लगी पानी की टोंटी और हैंड पम्पों के साथ छेड़छाड़ करते हैं, जिससे यात्री मजबूर होकर उनसे शीतल पेयों की खरीददारी करें। वर्तमान रेल मंत्री ने लोकसभा में विश्वास दिलाया कि रेल विभाग स्वयं ठंडे पानी की       बिक्री रियायती मूल्यों पर करेगा। परंतु कब?
कृष्ण मोहन गोयल, 113, बाजार कोट, अमरोहा

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