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परमाणु आतंकवाद वैध चिंता का कारण: प्रधानमंत्री

परमाणु आतंकवाद वैध चिंता का कारण: प्रधानमंत्री

परमाणु सुरक्षा शिखरवार्ता में भाग लेने के लिए शनिवार को अमेरिका रवाना हो रहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को कहा कि परमाणु आतंकवाद और संवेदनशील प्रौद्योगिकियों का प्रसार वैध चिंताओं की वजह है, जिनके लिए कड़ी प्रतिक्रिया की जरूरत है।

प्रस्थान से पूर्व यहां अपने वक्तव्य में मनमोहन ने परमाणु विज्ञान के फायदों में जनता के विश्वास को बनाने के लिहाज से परमाणु क्षेत्र में सुरक्षा के सर्वोच्च मानकों की जरूरत पर जोर दिया। अमेरिका में 12-13 अप्रैल को आयोजित दो दिवसीय शिखरवार्ता अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की पहल पर हो रही है, जिसमें परमाणु सामग्री के गुप्त प्रसार और अवैध तस्करी के खतरों और आतंकवादियों द्वारा परमाणु सामग्री खरीदे जाने की संभावना पर गौर किया जाएगा।

इस शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री आतंकवादियों की ओर से व्यापक विनाश के हथियारों को हासिल किए जाने के बारे में अपनी चिंताओं को सामने रख सकते हैं। इस विषय पर पाकिस्तान में अधिक खतरा है, जहां परमाणु पदार्थ को सुरक्षित हाथों में नहीं माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत राष्ट्रपति ओबामा द्वारा परमाणु सुरक्षा पर शिखरवार्ता आयोजित करने के लिए की गई पहल का स्वागत करता है। वह शनिवार से शुरू हो रही अपनी अमेरिका यात्रा में 42 अन्य देशों के नेताओं के साथ परमाणु सामग्री और प्रतिष्ठानों को सुरक्षित रखने के लिए वैश्विक प्रयासों को मजबूत बनाने पर चर्चा करेंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय की विकास से जुड़ी चुनौतियों पर ध्यान देने के लिए परमाणु ऊर्जा की बड़ी भूमिका की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह तभी संभव होगा जब हम अलग-अलग राष्ट्रों के तौर पर और एक वैश्विक समुदाय के तौर पर सुरक्षा के सर्वोच्च मानक सुनिश्चित करें, जो जनता का परमाणु विज्ञान के फायदों में विश्वास पैदा करते हों। उन्होंने संकेत दिया कि इस वैश्विक प्रयास में भारत एक महत्वपूर्ण साझेदार है।

भारत के छह दशक पुराने भलीभांति विकसित और स्वदेश निर्मित परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि सुरक्षा, हिफाजत और अप्रसार का हमारा एक त्रुटिहीन रिकार्ड रहा है, जो एक जिम्मेदार परमाणु महाशक्ति के तौर पर हमारे आचरण को झलकाता है। उन्होंने इस बात की ओर इशारा किया कि भारत पूरी तरह वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण का हिमायती रहा है।

मनमोहन सिंह के अनुसार, हम दुनिया को परमाणु हथियारों से मुक्त बनाने का आह्वान करने वाले शुरुआती देशों में से हैं। मैं इस तथ्य से उत्साहित हूं कि इस पहल की आज बड़े स्तर पर गूंज देखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि भारत इस दिशा में और सार्थक प्रगति के लिए आहवान करता रहेगा।

शिखरवार्ता में मनमोहन सिंह परमाणु सामग्री को भौतिक संरक्षण और कानूनी प्रणाली के जरिए सुरक्षित रखने की प्रक्रिया को अधिक गति प्रदान करने पर जोर दे सकते हैं। वह भारत में एक अंतरराष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव भी इस दौरान रख सकते हैं।

भारत इस शिखर सम्मेलन और इससे जुड़ी तैयारियों को परमाणु सुरक्षा सुनिश्चित करने और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए उपयोग के उपायों को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानता है। अपनी यात्रा के पहले चरण में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह चार दिन तक वाशिंगटन में रूकेंगे जहां वह दो दिवसीय परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा, फ्रांसीसी राष्ट्रपति निकोलस सारकोजी और कनाडाई प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर से मुलाकात करेंगे।

अपनी आठ दिवसीय यात्रा के दूसरे चरण में सिंह ब्राजील में ब्राजील-रूस-भारत-चीन (ब्रिक) और भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका (आईबीएसए) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इन शिखर सम्मेलनों में ईरान के विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम और संभावित संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समेत अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये गठजोड़ वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की बढ़ती भूमिका को झलकाता है। उन्होंने कहा कि आईबीएसए की प्रक्रिया आज इस स्तर पर आ चुकी है कि इसमें व्यापक गतिविधियां शामिल हैं जो भारत के इन सभी देशों के साथ उत्कृष्ट द्विपक्षीय रिश्तों को जोड़ती हैं।

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