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‘बिदेसिया’ समेत पांच नाटकों की प्रस्तुति

भिखारी ठाकुर की अमर कृति बिदेसिया आज भी हिट है। कालिदास रंगालय में बेगूसराय के रंगकर्मियों द्वारा प्रस्तुत इस नाटक को देखने नाट्यप्रमियों की भीड़ व डॉयलागों पर बजतीं तालियां यही संकेत दे रहा था।आगरा की प्रस्तुति पारुल में समाज में एक अकेली औरत का दर्द मंच पर साकार हुआ। प्रांगण द्वारा आयोजित पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव के तीसर दिन बुधवार को तीन नाटकों का मंचन हुआ जबकि दो नाटकों की नुक्कड़ प्रस्तुति हुई। मार्डन थिएटर फाउंडेशन बेगूसराय की प्रस्तुति बिदेसिया में नारी की पीड़ा व पलायन की समस्या मुखर हुई। नटरांजलि थिएटर आर्ट आगरा ने मालती जोशी के उपन्यास पर आधारित पारुल में मुख्य भूमिका ललिता सोनी, अलका सिंह, ओमप्रकाश की थी। केशव प्रसाद सिंह लिखित नाटक का निर्देशन अलका सिंह ने किया था। भिखारी ठाकुर नाट्य संस्था, आरा द्वारा एम कन्हाई लाल की रचना व संजय कुमार पाल के निर्देशन में ‘तेतू’ का मंचन हुआ।ड्ढr ड्ढr लोकल से ही नेशनल बनेगा थिएटरड्ढr पटना(का.सं.)। लोकल स्तर पर थिएटर मजबूत होगा तभी राष्ट्रीय स्तर पर थिएटर समृद्ध होगा। श्रीराम सेंटर के पूर्व निदेशक संजय उपाध्याय ने बुधवार को युवा आवास में आयोजित नाट्य परिचर्चा में यह बातें कहीं। अध्यक्षता करते हुए आगरा के वरिष्ठ रंगकर्मी केशव प्रसाद सिंह ने कहा कि सरकारी सहायता के बलबूते रंगमंच आगे नहीं बढ़ सकता है।

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