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फरीदाबाद के कबाड़ पर दिल्ली की नजर

कलपुजों की नगरी फरीदाबाद में जिस गति से उद्योगों ने पैर पसारे हैं। उसी तेजी से कबाड़ व्यवसाय बढ़ा है। हजारों फैक्ट्रियों से निकलने वाले कबाड़ का धंधा इन दिनों मासिक करीब एक हजार करोड़ रूपए तक पहुंच गया है।

पड़ोसी प्रदेश दिल्ली में कबाड़ पर वैट दर बढ़ने से दिल्ली के करोबारियों की नजर इन दिनों शहर पर है। रोजाना बड़ी संख्या में ट्रक कबाड़ शहर से ले जा रहे हैं।

गौरतलब है कि शहर में छोटी-बड़ी करीब 20 हजार फैक्ट्रिया हैं। जिनमें 15 हजार से ज्यादा फैक्ट्रिया स्टील उद्योग से जुड़ी है। इन फैक्टियों से रोजाना एक हजार टन से ज्यादा का कबाड़ निकलता है।

हाल में दिल्ली सरकार ने कबाड़ पर वैट दर पांच फिसदी से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया। जबकि हरियाणा में अब भी वैट दर पांच प्रतिशत ही है। इसका फायदा उठाने के लिए दिल्ली के कबाड़ कारोबारियों की नजर फरीदाबाद में लगी हुई है।

पिछले एक हफ्ते से दिल्ली के व्यवसाई बड़ी तादात में फरीदाबाद से कबाड़ खरीदकर ले जा रहे हैं। ताकि सात प्रतिशत वैट दर का फायदा उठाया जा सके। कबाड़ के धंधे से जुड़े राम सरन भाटिया ने बताया कि शहर की फैक्ट्रियों से निकलने वाले कबाड़ का धंधा हर महीने एक हजार करोड़ से ज्यादा का हो गया है।

उन्होंने बताया कि इसमें ज्यादातर स्टील मैटेरियल निकलने वाला वेस्टेज होता है। साथ प्लास्टिक उद्योग से भी बड़ी मात्र में कबाड़ निर्यात किया जाता है।

दिल्ली के ज्यादातर व्यवसाई फरीदाबाद से प्लॉस्टिक कबाड़ ले जाते हैं। क्योकि दिल्ली में प्लास्टिक सामान बनाने वाली हजारों फैक्ट्रियां है। जिनमें कबाड़ को गलाकर दोबार उन्हें काम के लायक बनाया जाता है।

 

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